सेंट्रल जीएसटी की टीम को कर चोरी कर टायरों को नेपाल में निर्यात करने की जानकारी मिली थी। जांच में सामने आया कि गोरखपुर से नेपाल भेजे जाने वाले टायरों की पूरी सूची पर कस्टम विभाग की मोहर लगती है। इन्हीं मोहरों की जांच में पता चला कि टायर गोरखपुर के मोदी केयर फर्म से नेपाल भेजे गए थे। जब यह पता लगाने की कोशिश हुई कि नेपाल में किस फर्म को टायर बेचा गया है तो उसका रिकॉर्ड नहीं मिला। इसी से पूरा खेल खुल गया।
इसे भी पढ़ें:
विदेश में व्यापार के लिए एलयूटी पंजीकरण अनिवार्य
जांच में सामने आया कि मोदी केयर फर्म ने विदेश में व्यापार करने के लिए लेटर ऑफ अंडरटेकिंग का पंजीकरण किया है। कस्टम से स्वीकृत के बाद ही फर्म अपने सामान को नेपाल में बेचती है। लेकिन, इसी बीच विभिन्न फर्मों के खेल से करोड़ों रुपये के जीएसटी चोरी की बात सामने आ गई।
सराफा पदाधिकारी उलझ गए
हिंदी बाजार में सैकड़ों दुकानें सोने-चांदी की हैं। ऐसे में सेंट्रल जीएसटी की टीम जैसे ही बाजार के एक व्यापारी के घर पहुंची तो अफरातफरी मच गई। इसी बीच किसी ने सराफा पदाधिकारियों को भी सूचना दे दी। जीएसटी की टीम के कार्रवाई के बीच ही सराफा पदाधिकारियों ने अधिकारियों से बातचीत की। कुछ देर तक उनसे उलझते रहे। जब उन्हें ये पता चला कि सोने-चांदी के व्यापारी के यहां नहीं बल्कि टायर के एक कारोबारी के यहां छापा पड़ा है, तो सभी किनारे हट गए।