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विश्व हेपेटाइटिस दिवस: मरीजों का समय से हो इलाज तो बचेगी जान, ये है बीमारी की बड़ी वजह

Wed, 28 Jul 2021 08:55 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

प्रदेश में करीब 11.50 लाख हेपेटाइटिस-सी और 55 लाख हेपेटाइटिस बी के मरीज हैं। गोरखपुर में हर साल करीब 70 से 80 हजार बच्चों को ही लगाया जाता है इंजेक्शन।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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हेपेटाइटिस से पीड़ित मरीजों का इलाज अगर शुरुआती दौर में शुरू हो जाए तो मरीज पूरी तरह से ठीक हो सकते हैं। प्रदेश में करीब 11.50 लाख हेपेटाइटिस-सी और 55 लाख हेपेटाइटिस बी के मरीज हैं। पूरे देश की बात करें तो करीब 44 प्रतिशत बच्चों को ही हेपेटाइटिस-बी का इंजेक्शन लग पाता है। वहीं, गोरखपुर जिले की बात करें तो हर साल करीब 70 से 80 हजार बच्चों को ही यह इंजेक्शन लगाया जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए इस बार विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने हेपेटाइटिस कांट वेट थीम रखा है। 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है।
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जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि जिला अस्पताल में हर सप्ताह हेपेटाइटिस बी और सी के करीब पांच से सात मरीज इलाज के लिए आते हैं। जबकि बीआरडी में यह संख्या 10-12 के बीच है। बताया कि सही समय पर अगर मरीजों का इलाज हो जाए तो 90 प्रतिशत मरीज ठीक हो जाते हैं। इस बीमारी में मरीज को एंटी वायरल दवाएं दी जाती हैं। इसके अलावा इंटरफेरॉन का इंजेक्शन मरीज को सप्ताह में तीन बार और रीबाविरिन की गोलियां प्रतिदिन छह महीने खानी पड़ती है।

कई बार देर से नजर आते हैं लक्षण
एमडी मेडिसिन डॉ गौरव पांडेय ने बताया कि हेपेटाइटिस सी नामक विषाणु से होने वाली इस बीमारी में सूजन आ जाती है। यह विषाणु धीरे-धीरे लिवर को नुकसान पहुंचाता है। ज्यादातर मरीजों को इसकी जानकारी समय पर नहीं हो पाती है। बाद में यह लिवर फाइब्रोसिस और लिवर सीरोसिस बन जाता है। हेपेटाइटिस-सी कई चरणों में होता है। तेजी से होने पर लिवर में सूजन आती और 20 फीसदी मरीजों को पीलिया हो जाता है। इसकी वजह से भूख की कमी, मिचली, बदन दर्द, थकान, जोड़ों में दर्द आदि लक्षण आते हैं। जबकि 25 से 30 प्रतिशत मरीजों में यह संक्रमण खुद ही ठीक हो जाता है। 50 से 80 प्रतिशत मरीजों में संक्रमण लंबे समय तक रहता है, जो सिरोसिस का कारण बन जाता है। इससे लिवर सिकुड़ जाता है। इसकी वजह से मौत भी हो जाती है।
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बीमारी की ये है बड़ी वजह

हेपेटाइटिस फैलने की सबसे बड़ी वजह किसी भी हेपेटाइटिस सी संक्रमित व्यक्ति का रक्त, प्लाज्मा या प्लेटलेट्स चढ़ाने, दूषित सीरींज का इस्तेमाल करने, हेपेटाइटिस सी संक्रमित से असुरक्षित यौन संबंध बनाने, संक्रमित सूई से टैटू बनवाने, कान छिदवाने, संक्रमित का रेजर या टूथब्रश का इस्तेमाल करने से और नवजात बच्चे को मां से यह बीमारी हो सकती है।

बचाव के लिए इन तरीकों का करें इस्तेमाल
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि खून, प्लाज्मा संक्रमित व्यक्ति से न लें। सूई से टैटू आदि बनवाने से बचें। प्रसव और सर्जरी से पहले हर मरीज की वायरल स्क्रीनिंग अनिवार्य रूप से कराएं। सुरक्षित यौन व्यवहार अपनाएं। हेपेटाइटिस मरीजों की डायलिसिस की सुविधा अलग से कराई जाए।

इलाज के लिए यह इंतजाम करें
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि पीड़ित व्यक्ति के खून की जांच कराई जाएं। एचवीस-आरएनए सबसे बेहतर टेस्ट है। इसके नतीजे सबसे सटीक है। इस जांच के बाद से वाइरल लोड और वायरस का जीनो टाइप का पता चलता है। इसके बाद ही दवाएं दी जाती है। इसी तरह से एचसीवी सीरोलॉजी से एंटीबॉडी जांच की जाती है। इससे सही जानकारी मिल पाती है।
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