जूता पोंछने व फाड़ने के भी मामले
कई यात्री चादरों और तौलिए से जूता तक पोंछते हैं। पॉलिश के काले धब्बे भी जल्दी नहीं छूटते। ऐसे में इन्हें कंडम घोषित कर दिया जाता है। वहीं दो महीने में सौ से ज्यादा चादरें फटी मिली हैं।
एक साल है इस्तेमाल की अवधि
एक चादर के इस्तेमाल की अवधि एक साल है। इसके बाद इसे बदल दिया जाता है। खराब हुई चादरें दो महीने ही उपयोग की गई हैं। इसी तरह कंबल के इस्तेमाल की अवधि रेलवे ने चार साल निर्धारित की है।
पैकेट पर स्वच्छता की अपील
बेडरोल को पैकेट में रखकर दिया जाता है। पैकेट पर स्वच्छता संबंधित अपील भी छपी होती है, जिसमें साफ तौर पर लिखा होता है कि चादरों में जूता, सूटकेस अथवा खाने पीने की चीजें न पोंछें, लेकिन लोग इस संदेश पर अमल नहीं करते हैं।
इन ट्रेनों में दिया जा रहा है बेडरोल
गोरखपुर-छपरा, गोरखधाम एक्सप्रेस, गोरखपुर-आनंद विहार ( दो ट्रेन), गोरखपुर-पुणे, गोरखपुर-शालीमार, गोरखपुर-यशवंतपुर ( तीन ट्रेनें), गोरखपुर-सिकंदराबाद, गोरखपुर-कोचिवेली, गोरखपुर-कोलकाता एक्सप्रेस ( तीन ट्रेनें)
मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि रेलवे यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। कैंपेन चला कर स्टेशनों एवं ट्रेनों में बेहतर साफ-सफाई सुनिश्चित कराई जा रही है। ऐसे में सभी यात्रियों से अपील है कि यात्रा के दौरान मिलने वाली चादर और कंबल पर खाद्य पदार्थ न रखें।