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Exclusive: यात्रीगण ध्यान दें- ये दाग आपके व्यक्तित्व पर हैं...

Sat, 25 Jun 2022 02:57 PM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर।

सार

एनईआर की ट्रेनों में तेल-मसालों के धब्बों से हर माह तीन हजार चादरें खराब हो रहीं हैं। यात्रीगण चादरों पर ही नाश्ता-भोजन रखकर करते हैं, कुछ तो जूता भी साफ करते हैं।
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लांड्री में धुलाई के बाद भी नहीं छूट रहा चादर पर गिरी चाय। ट्रेन में दी गई चादर पर खाना खाकर खराब कर दे रहे यात्री। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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ट्रेनों के एसी कोच में सफर करने वाले कुछ यात्रियों की दूषित मानसिकता का खामियाजा रेल विभाग के साथ ही अन्य यात्रियों को भी उठाना पड़ रहा है। ये यात्री जिस चादर को इस्तेमाल में लाते हैं, उसी पर थाली रखकर भोजन करते हैं। कुछ तो जूठा बर्तन भी पोंछ देते हैं।

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तेल-मसाले के दाग लांड्री में धुलाई के बाद भी नहीं छूटते। अप्रैल-मई महीने में छह हजार चादरें ऐसी हैं, जो दाग-धब्बों से खराब हो गईं। कह सकते हैं कि चादरों के ये दाग ऐसा करने वाले यात्रियों के व्यक्तित्व पर भी सवालिया निशान खड़ा करते हैं।

कोरोना संक्रमण का प्रभाव कम होने पर 15 अप्रैल से पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने ट्रेनों में बेडरोल देने का निर्णय लिया। गोरखपुर जंक्शन से कुल 24 एक्सप्रेस ट्रेनें बनकर चलती हैं, इनमें अभी 14 ट्रेनों में बेडरोल (चादर, तकिया, तौलिया, कंबल) मुहैया कराया जा रहा है। मगर, कुछ यात्रियों की लापरवाही रेलवे पर भारी पड़ रही है। सबसे ज्यादा शिकायतें लंबी दूरी की ट्रेनों में है।
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आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल में 3400 और मई में 2600 चादरों पर दाग-धब्बे मिले हैं। रेलवे स्टेशन स्थित मैकेनाइन्ड लांड्री में काम करने वाले कर्मचारी बताते हैं कि केमिकल का इस्तेमाल करने के बाद चादर से दाग पूरी तरह नहीं छूटते। जिसके बाद चादरें कंडम घोषित कर दी जाती हैं।

 

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जूता पोंछने व फाड़ने के भी मामले

कई यात्री चादरों और तौलिए से जूता तक पोंछते हैं। पॉलिश के काले धब्बे भी जल्दी नहीं छूटते। ऐसे में इन्हें कंडम घोषित कर दिया जाता है। वहीं दो महीने में सौ से ज्यादा चादरें फटी मिली हैं।

एक साल है इस्तेमाल की अवधि

एक चादर के इस्तेमाल की अवधि एक साल है। इसके बाद इसे बदल दिया जाता है। खराब हुई चादरें दो महीने ही उपयोग की गई हैं। इसी तरह कंबल के इस्तेमाल की अवधि रेलवे ने चार साल निर्धारित की है।

पैकेट पर स्वच्छता की अपील

बेडरोल को पैकेट में रखकर दिया जाता है। पैकेट पर स्वच्छता संबंधित अपील भी छपी होती है, जिसमें साफ तौर पर लिखा होता है कि चादरों में जूता, सूटकेस अथवा खाने पीने की चीजें न पोंछें, लेकिन लोग इस संदेश पर अमल नहीं करते हैं।

इन ट्रेनों में दिया जा रहा है बेडरोल

गोरखपुर-छपरा, गोरखधाम एक्सप्रेस, गोरखपुर-आनंद विहार ( दो ट्रेन), गोरखपुर-पुणे, गोरखपुर-शालीमार, गोरखपुर-यशवंतपुर ( तीन ट्रेनें), गोरखपुर-सिकंदराबाद, गोरखपुर-कोचिवेली, गोरखपुर-कोलकाता एक्सप्रेस ( तीन ट्रेनें)

मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि रेलवे यात्रियों को बेहतर सुविधा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। कैंपेन चला कर स्टेशनों एवं ट्रेनों में बेहतर साफ-सफाई सुनिश्चित कराई जा रही है। ऐसे में सभी यात्रियों से अपील है कि यात्रा के दौरान मिलने वाली चादर और कंबल पर खाद्य पदार्थ न रखें।
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