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कोरोना से जंग जीत चुके लोगों पर दोबारा हो सकता है वायरस का 'अटैक', जानिए किस बात से हैरान हैं विशेषज्ञ

Wed, 30 Sep 2020 12:22 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, गोरखपुर।

सार

  • तीस फीसदी में नहीं मिली एंटीबॉडी, दोबारा कोरोना संक्रमण का खतरा
  • डॉक्टर बता रहे गंभीर मामला, शोध की जरूरत
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : ANI
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना से संक्रमित होने के बाद स्वस्थ होने वाले करीब 30 फीसदी लोगों में एंटीबॉडी नहीं बन रही है। विशेषज्ञ भी हैरान हैं कि जब एंटीबॉडी नहीं बनी तो कोरोना वायरस का असर शरीर से खत्म कैसे हुआ?

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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि जिले में संक्रमित लोगों में से अब तक 25 से 30 प्रतिशत ऐसे लोग मिले हैं, जो संक्रमित होने के बाद ठीक हो गए, लेकिन उनके अंदर एंटीबॉडी विकसित नहीं हुई। ऐसे लोगों पर वायरस का अटैक दूसरी बार भी हो सकता है।
 
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि संक्रमित व्यक्ति अगर ठीक हो जाता है, तो उसके शरीर में 35 से 40 दिनों तक एंटीबॉडी विकसित रहती है। लेकिन, ठीक होने के दौरान संक्रमित व्यक्ति के शरीर में अगर एंटीबॉडी विकसित नहीं हो रही है, तो यह शोध का विषय है।

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डॉ. अमरेश सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
डॉ. अमरेश ने बताया कि एंटीबॉडी न बनना इम्युनिटी (प्रतिरोधक क्षमता) का कमजोर होने का एक कारण माना जाता है, लेकिन कोरोना संक्रमण मामले में जब तक इम्युनिटी मजबूत नहीं होगी, तब तक वायरस का असर शरीर से जाएगा नहीं। अगर इम्युनिटी कमजोर हुई तो वायरस का लोड लगातार बढ़ता जाएगा और मरीज को ठीक होने में ज्यादा समय लगेगा। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों में एंटीबॉडी नहीं बनी है वह 10 से 14 दिनों में ठीक हो गए हैं। इसलिए यह ज्यादा चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग सावधानी बरतें। समय रहते जांच कराएं। अगर दोबारा संक्रमण हुआ तो शरीर को ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है।

केस-एक
डॉक्टर दंपती में नहीं मिला एंटीबॉडी

शहर के रहने वाले एक नामी डॉक्टर दंपती कोरोना संक्रमण के शिकार हो गए। होम आइसोलेशन के दौरान 10 दिनों के अंदर वह ठीक भी हो गए। चिकित्सक ने एहतियातन एंटीबॉडी की जांच कराई। रिपोर्ट आई तो डॉक्टर दंपती हतप्रभ रह गए। पता चला कि एंटीबॉडी ही नहीं बनी है। ऐसे में संक्रमण का खतरा बना रहेगा।
 
केस-दो
गोरखनाथ क्षेत्र में 10 नंबर बोरिंग के पास रहने वाले एक परिवार के चार लोग संक्रमण के शिकार हो गए। अलक्षणिक मरीज थे। लिहाजा, पूरा परिवार होम आइसोलेट हो गया। कुछ दिन बाद घर के 55 वर्षीय व्यक्ति की दोबारा तबीयत खराब हो गई। इसपर डॉक्टर ने एंटीबॉडी जांच कराने की सलाह दी। रिपोर्ट आई तो पता चला कि एंटीबॉडी नहीं बनी है।
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