चिड़ियाघर की भी मिल चुकी है सौगात, एशिया का पहला जटायु संरक्षण केंद्र भी गोरखपुर में
गोरखपुर में बना प्रदेश का पहला स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट
रामगढ़ताल का हुआ कायाकल्प, चिलुआताल भी निखरा
गोरखपुर। कभी माफियागिरी और पिछड़ेपन के तमगे वाली गोरक्षनगरी आज पयर्टन के नक्शे पर चमक रही है। बीते नौ साल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में बदलाव ऐसा हुआ है कि गोरखपुर की पहचान पूर्वी उत्तर के नव पर्यटन केंद्र के रूप में होने लगी है। एशिया का पहला जटायु संरक्षण केंद्र भी गोरखपुर में है और प्रदेश का पहला स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट भी। यह शहर टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी के क्षेत्र में तेजी से बढ़ा है।
गोरखपुर भौगोलिक रूप से बौद्ध सर्किट के केंद्र में स्थित है। तथागत बुद्ध से जुड़े चार प्रमुख स्थानों सारनाथ, कुशीनगर, कपिलवस्तु और लुम्बिनी जाने वाले अधिकांश पर्यटक यहीं से होकर जाते हैं। कुछ साल पहले तक देश के अन्य राज्यों और विदेशी पर्यटकों के अनुरूप हॉस्पिटैलिटी सेक्टर नहीं था। पर्यटन के लिए बेहतर जगह नहीं थी लेकिन अब फाइव स्टार होटलों की खड़ी होती श्रृंखला, सेवन डी थिएटर वाला जू, रामगढ़ताल व चिलुआताल जैसी नैसर्गिक झीलों का टूरिस्ट स्पॉट के रूप में कायाकल्प हुआ है। इसके अलावा वाटर एडवेंचर की गतिविधियां और क्रूज-फ्लोटिंग रेस्टोरेंट लोगों को रोमांचित कर रहा है।
गोरखपुर में पर्यटन के क्षेत्र में रामगढ़ताल कायाकल्प का सबसे बड़ा उदाहरण है। दशकों तक उपेक्षित और गंदगी के पर्याय बन रहे 1700 एकड़ में फैले इस प्राकृतिक रामगढ़ताल ताल पर सरकार ने ऐसी संजीदगी दिखाई कि आज इसकी गिनती पूर्वी उत्तर प्रदेश के खूबसूरत व दर्शनीय पर्यटन स्थल के रूप में अग्रपंक्ति में है। रामगढ़ताल से सटे पर्यटन विभाग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर का वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी बनवा दिया है। यह प्रदेश का सार्वजनिक क्षेत्र का पहला वाटर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है। यहां खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स की रोइंग प्रतियोगिता का सफल आयोजन हो चुका है और अब स्थानीय युवाओं को रोइंग की ट्रेनिंग मिल रही है। रामगढ़ताल की ही तर्ज पर शहर के उत्तरी छोर पर स्थित चिलुआताल का भी कायाकल्प हो चुका है।
गोरखपुर में इको टूरिज्म की भी शुरुआत हो चुकी है। शहीद अशफाक उल्ला खां के नाम पर बने चिड़ियाघर में दुर्लभ वन्य जीवों को देखने के लिए पूरे पूर्वांचल से लोग यहां आ रहे हैं तो चिड़ियाघर का 7-डी थिएटर पर्यटकों को खूब रोमांचित कर रहा है। चिड़ियाघर के साथ ही गोरखपुर वन प्रभाग के तहत कैम्पियरगंज रेंज में दुनिया का पहला राजगिद्ध (जटायु) संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र भी बन चुका है।