गोरखपुर। आस्था और आधुनिक जीवनशैली के बीच संतुलन साधते हुए इन दिनों एक खूबसूरत ट्रेंड देखने को मिल रहा है। शहर के कई क्षेत्रों में विशेष ठाकुर जी सेवा केंद्र खुल गए हैं। यहां लोग छुट्टियों या किसी जरूरी काम से बाहर जाने के दौरान अपने लड्डू गोपाल को सेवा-देखभाल के लिए सौंप रहे हैं। इस नई व्यवस्था से श्रद्धालु महिलाएं बेहद संतुष्ट हैं।
शहर में चल रहे इन अनूठे सेवा केंद्र में लड्डू गोपाल की देखरेख बिल्कुल एक छोटे बच्चे की तरह की जाती है। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ठाकुर जी को मधुर भजनों के साथ जगाया जाता है। इसके बाद उन्हें गंगाजल से स्नान करवाकर सुंदर वस्त्र और आभूषणों से सजाया जाता है। दिनभर में उन्हें माखन-मिश्री, मौसमी फलों और शुद्ध सात्विक भोजन का समय पर भोग लगाया जाता है। दोपहर में विश्राम और शाम को ढोल-मंजीरों के साथ आरती की जाती है।
इस कार्य को सिविल लाइंस की पल्लवी अग्रवाल पूरे समर्पण के साथ कर रही हैं। उन्होंने बताया कि वह ठाकुर जी का साक्षात बाल रूप मानकर सेवा करती हैं। उन्हें इस काम से अत्यधिक मानसिक शांति और आत्मिक संतोष मिलता है। जब यात्रा से लौटकर महिलाएं अपने लड्डू गोपाल को सुरक्षित देखती हैं तो उन्हें भी काफी खुशी होती है।
सात साल से घर पर कर रहीं लड्डू गोपाल की सेवा
इस सेवा की एक और मजबूत कड़ी कुसुम अग्रवाल हैं। वह पिछले सात साल से ठाकुर जी की सेवा कर रहीं हैं। वह अपने घर से ही इस कार्य को संचालित कर रही हैं। कुसुम केवल सेवा ही नहीं करतीं बल्कि ठाकुर जी के शृंगार के लिए खुद से पेंटिंग का काम और वस्त्र भी तैयार करती हैं। इस कार्य में उनकी सहायता के लिए चार स्टाफ सदस्यों की एक टीम भी है। कुसुम ने बताया कि उनकी यह कला देशभर में फैली है। गोरखपुर के साथ हैदराबाद, चेन्नई, मुंबई, दिल्ली, पंजाब, वाराणसी और लखनऊ से भी भक्त ऑर्डर भेजते हैं।
बोली महिलाएं
मेरे लिए ठाकुर जी को घर में अकेला छोड़ना असंभव था। जब मुझे 15 दिनों के लिए मुंबई जाना पड़ा तो पहली बार मैंने उन्हें सेवा केंद्र में सौंपा। मेरा अनुभव अद्भुत रहा। मेरे लड्डू गोपाल की ऐसी सेवा हुई जैसी मैं खुद घर पर करती हूं। मुझे समय पर उनके शृंगार और भोग की तस्वीरें मिलती रहीं।
- श्वेता गुप्ता, लालडिग्गी
मैं कई बार अपने लड्डू गोपाल को सेवा के लिए दे चुकी हूं। पहले जब भी बाहर जाना होता था उन्हें साथ लेकर सफर करना पड़ता था। इससे भीड़-भाड़ में उनके खंडित होने या सेवा में चूक होने का डर रहता था। हाल ही में मैं पांच दिन के लिए दिल्ली गई थी। उस समय अपने ठाकुर जी को सेवा केंद्र में निश्चिंत छोड़ आई थी। वहां मेरे ठाकुर जी का ध्यान बहुत अच्छे से रखा गया। मैं इस सेवा से पूरी तरह संतुष्ट हूं।
- राधिका, सिविल लाइंस