स्वेदशी निर्मित 'कवच' तकनीक से ट्रेन चलाते समय लोको पॉयलट के सभी क्रिया-कलापों मसलन ब्रेक, हार्न, थ्रोटल हैंडल आदि की निगरानी होती रहेगी। अगर लोको पायलट (ड्राइवर) से चूक होती है तो पहले ऑडियो-वीडियो के माध्यम से अलर्ट आएगा।
पूर्वोत्तर रेलवे में सबसे पहले कुसम्ही से भटनी (27.5 किमी) तक स्वदेशी तकनीक से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (एटीपीसी) 'कवच' की सुरक्षा में ट्रेनें दौड़ेंगी। इस तकनीक के काम करने से आमने-सामने और आगे-पीछे ट्रेन आते ही स्वत: रुक जाएगी। रेल ट्रैक, लोको (इंजन) और स्टेशन पर तकनीक को लगाने काम को तेजी से कराया जा रहा है और मार्च 2027 के पहले इस रूट पर ट्रायल का लक्ष्य रखा गया है।
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'कवच' तकनीक के तहत रेल ट्रैक, लोको और स्टेशन मास्टर कक्ष में संयंत्र लगाए जाने हैं। ऑन बोर्ड इक्यूपमेंट, जिसे लोको कवच भी कहा जाता है, इसमें वाइटल कम्प्यूटर, ब्रेक इंटरफेस यूनिट, लोको पायलट मशीन इंटरफेस, आरएफआईडी रीडर, पल्स जेनरेटर एवं रेडियो एंटीना लगाए जाते हैं।
एनईआर को मिले 213 कवच में से गोरखपुर लोको शेड को 60, गोंडा लोको शेड को 95 और सैदपुर लोको शेड को 58 उपकरण दिए गए हैं। इस वित्तीय वर्ष में 50 लोको में इसे लगाया जाना है। अब तक नौ लोको में लगाया जा चुका है।
वहीं, ट्रैक साइड पर लगने वाला स्टेशनरी कवच यूनिट है। इसमें स्टेशन मास्टर ऑपरेशन कम इंडीकेशन पैनल, कंक्रीट स्लीपरों पर आरएफआईडी टैग तथा 40 मीटर ऊंचे टावर एवं एंटीना लगाए जाने का कार्य किया जाता है। अब तक 30 टॉवर लगाए गए हैं। इसके अलावा स्टेशन मास्टर कक्ष में संयंत्र लगाए जाएंगे जहां ट्रेन का सिग्नल मिलता रहेगा।
पहले चरण में 551 किमी रूट पर लगेगा
पूर्वोत्तर रेलवे के 1,441 रूट किमी रेलमार्ग पर भारत में निर्मित (स्वदेशी) स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली ''''कवच'''' लगाया जाएगा। कवच लगाने के लिए रेल मंत्रालय ने 492.21 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है। पहले चरण में 551 रूट किमी रेलमार्ग पर कवच लगाया जाना है। मुख्य रेलमार्ग छपरा-बाराबंकी के बीच 108 टावर लगाए जाने हैं। अब तक 30 टावर लगाए जा चुके हैं।
इस रूट पर 'कवच' लगाने की मिली स्वीकृति
- मानकनगर-मल्हौर-गोरखपुर छावनी - गोरखपुर छावनी-छपरा ग्रामीण
यह है 'कवच' की खासियत
स्वेदशी निर्मित 'कवच' तकनीक से ट्रेन चलाते समय लोको पॉयलट के सभी क्रिया-कलापों मसलन ब्रेक, हार्न, थ्रोटल हैंडल आदि की निगरानी होती रहेगी। अगर लोको पायलट (ड्राइवर) से चूक होती है तो पहले ऑडियो-वीडियो के माध्यम से अलर्ट आएगा।
यदि इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं होती है तो ट्रेन में ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएगा। इसके अलावा ट्रेन को निर्धारित से अधिक गति पर चलने नहीं देगा। कवच प्रणाली जीपीएस, रेडियो फ्रीक्वेंसी आदि तकनीक से संचालित होगा।
एनईआर में ट्रेन हादसों का आंकड़ा -2003-04 00 02 -2004-05 01 01
-2005-06 00 02 -2006-07 अब तक 00 00
एनईआर में 'कवच' लगाने का काम सबसे पहले कुसम्ही से भटनी तक होगा। इस काम को मार्च 2027 तक पूरा करने की कोशिश है। कार्य को तेजी से पूरा कराया जा रहा है। इसके बाद इस रूट पर कवच सुरक्षा के बीच ट्रेनें दौड़ने लगेंगी:सुमित कुमार, सीपीआरओ, एनईआर