गोरखपुर। शोध केवल लिखने तक सीमित नहीं, उसकी गुणवत्ता, मौलिकता और सही प्रस्तुतीकरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से एमएमएमयूटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में चल रही पांच दिवसीय शोध उत्कृष्टता कार्यशाला का शुक्रवार को समापन हुआ। 14 से 18 सितंबर तक चली कार्यशाला में शोधार्थियों और शिक्षकों को शोध समस्या की पहचान से लेकर शोध-पत्र, थीसिस, अकादमिक प्रकाशन और पेटेंट तक की बारीकियां समझाई गईं।
एलन ट्यूरिंग हॉल में हुई कार्यशाला में शोध-पत्रों के आलोचनात्मक अध्ययन और गुणवत्तापूर्ण शोध समस्या की पहचान पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को शोध लेख की प्रभावी संरचना तैयार करने और निष्कर्षों को स्पष्ट एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के तरीके बताए गए। लेटेक्स से पेशेवर दस्तावेज, थीसिस लेखन, संदर्भ प्रबंधन और बीमर के माध्यम से अकादमिक प्रस्तुतीकरण का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया।
शोध को पेटेंट तक ले जाने की समझ
कार्यशाला में पेटेंट ड्राफ्टिंग और बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) पर भी प्रशिक्षण हुआ। शोध में सामने आए नए परिणामों की पहचान, उनके दस्तावेजीकरण और संरक्षण की प्रक्रिया समझाई गई। साहित्य अन्वेषण, शोधकर्ता प्रोफाइलिंग और शोध के प्रसार के लिए आधुनिक शोध उपकरणों के इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई।
कार्यशाला में एमएमएमयूटी के विभिन्न विभागों के साथ अन्य विश्वविद्यालयों और संस्थानों के शिक्षकों, शोधार्थियों व विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। समन्वय डॉ. विपुल नारायण, डॉ. अमित कुमार द्विवेदी और डॉ. स्वप्निता श्रीवास्तव ने किया। डॉ. राजकुमार, संजय कुमार और डॉ. मनीष कुमार गुप्ता सह-समन्वयक रहे। विभागाध्यक्ष प्रो. राकेश कुमार के मार्गदर्शन में हुई कार्यशाला में शोध की गुणवत्ता, मौलिकता, नैतिकता और वैज्ञानिक कठोरता को केंद्र में रखा गया।