गोरखपुर। गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) क्षेत्र में प्रस्तावित कॉमन इफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की स्थापना पर एक बार फिर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। यह प्लांट क्षेत्र की औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले रासायनिक और औद्योगिक अपशिष्ट जल के शोधन के लिए प्रस्तावित है।
गीडा प्रशासन ने पहले लगभग 57 करोड़ रुपये की लागत से प्लांट के निर्माण को मंजूरी दी थी। हालांकि, 15 साल तक के मेंटेनेंस खर्च को जोड़ने के बाद योजना की कुल लागत बढ़कर 198 करोड़ हो गई। इससे परियोजना की व्यवहार्यता और दीर्घकालिक संचालन पर सवाल उठने लगे हैं। शासन ने प्लांट के निर्माण और संचालन की व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें केवल निर्माण नहीं बल्कि रखरखाव, लागत वहन, शुल्क निर्धारण और उद्योगों की सहभागिता सुनिश्चित करना भी शामिल है।
इसी क्रम में गीडा प्रशासन ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में उद्यमियों के साथ बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस बैठक में संचालन मॉडल, व्यय का बंटवारा, उद्योगों की जिम्मेदारी और संभावित प्रबंधन संरचना पर विस्तृत चर्चा होगी। पिछले वर्षों में सीईटीपी परियोजना कई बार अटकी रही है। कभी भूमि तो कभी लागत और संचालन व्यवस्था को लेकर असमंजस की स्थिति रही। अब शासन की ओर से विस्तृत कार्ययोजना मांगे जाने से परियोजना की समय सीमा पर फिर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
गीडा के एसीईओ राम प्रकाश ने बताया कि डीएम की अध्यक्षता में जल्द ही उद्यमियों के साथ बैठक होगी। इसमें निर्माण, संचालन, लागत और उद्योगों की भागीदारी पर चर्चा कर ठोस कार्ययोजना शासन को भेजी जाएगी।