गोरखपुर। यह मामला इस बात को उजागर करता है कि वित्तीय जागरूकता रखने वाले लोग भी साइबर अपराधियों के जाल में फंस सकते हैं। पीड़ित बैंक मैनेजर को कुछ दिनों पहले एक अनजान व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां उन्हें इंस्टेंट प्रॉफिट ट्रेडिंग, गारंटीड रिटर्न और एक्सक्लूसिव इन्वेस्टमेंट टिप्स के नाम पर आकर्षक ऑफर दिए गए। शुरुआती दौर में मामूली लाभ दिखाकर उनका भरोसा जीता गया और फिर धीरे-धीरे उन्हें अधिक निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
भरोसे में आकर उन्होंने कुल 42.50 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्होंने रकम निकालने की कोशिश की तो न तो पैसे वापस मिले और न ही संबंधित लोग संपर्क में रहे। पुलिस ने मामला दर्ज कर साइबर सेल को जांच सौंप दी है। शुरुआती जांच में यह संगठित साइबर ठगी गिरोह का मामला बताया जा रहा है, जो फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और नकली एप के जरिये लोगों को फंसाता है।
केस-1
अगस्त 2025 में गोरखनाथ थाना क्षेत्र के रिटायर्ड शिक्षक को डिजिटल अरेस्ट कर 14 लाख रुपये की जालसाजी हुई थी। जालसाजों ने एनआईए का अधिकारी बताकर कॉल की थी। 27 जुलाई को दोपहर करीब तीन बजे एक अज्ञात व्यक्ति ने व्हाट्सएप कॉल की। उसने कहा-मैं एनआईए का अधिकारी बोल रहा हूं। तुम पाकिस्तानी आतंकवादियों से बातें करते हो। आतंकवादियों से रुपये की लेन-देन भी करते हो। तुम्हें 24 घंटे डिजिटल अरेस्ट किया जा रहा है, जांच होगी। इसके बाद उन्होंने रुपये ट्रांसफर किए थे। मामले में साइबर पुलिस ने जांच करते हुए पीड़ित के 13.87 लाख रुपये वापस करवा दिए थे।
केस-2
अगस्त 2025 में चिलुआताल क्षेत्र के मिलेनियम सिटी कॉलोनी के रिटायर्ड एक्सईएन से शेयर बाजार में निवेश का झांसा देकर करीब 25 लाख की साइबर ठगी हुई थी। पीड़ित ने बताया कि 20 जुलाई को फेसबुक पर एक वीडियो विज्ञापन पर नजर पड़ी। इसमें कैपप्लेस डाॅट काम को डॉलर में निवेश के लिए एक सुरक्षित मंच बताया गया। वीडियो के लिंक पर क्लिक किया तो फेसबुक के जरिये साइन अप लिंक से कैपप्लेस डाॅट काम वेबसाइट पर पहुंचा। उसपर निवेश से जुड़ी बातों को पढ़कर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरा। इस निवेश के बाद कुछ समय तक डैशबोर्ड पर लाभ दिखता रहा जिससे विश्वास बढ़ गया। कुछ दिन बाद लाभ घटने लगा, तब कर्मचारी कॉल करने लगे। उन्होंने कहा कि जल्द और रकम ट्रांसफर करिए वरना पूरे रुपये डूब जाएंगे। यह सुनकर एक अगस्त 2025 को 9.80 लाख रुपये डाल दिए। कुछ दिन बाद लाभ घटने लगा, तब कर्मचारी कॉल करने लगे। उन्होंने कहा कि जल्द और रकम ट्रांसफर करिए वरना पूरे रुपये डूब जाएंगे। यह सुनकर एक अगस्त 2025 को 9.80 लाख रुपये डाल दिए।
एक्सपर्ट की राय
ऐसे मामलों में लालच और त्वरित लाभ सबसे बड़ा ट्रिगर होता है। कोई भी वैध निवेश प्लेटफॉर्म गारंटी युक्त रिटर्न का दावा नहीं करता। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी अनजान लिंक, ग्रुप या एप के माध्यम से निवेश करने से पहले उसकी पूरी सत्यता जांचना जरूरी है।
- राशिद खान, साइबर सेल प्रभारी
बचने के उपाय
- अनजान व्हाट्सएप/टेलीग्राम ग्रुप से आए निवेश ऑफर से बचें।
- गारंटीड प्रॉफिट या डबल रिटर्न जैसे दावों पर भरोसा न करें।
- किसी भी एप या वेबसाइट की सेबी रजिस्ट्रेशन की जांच करें।
- ओटीपी, बैंक डिटेल या पर्सनल जानकारी साझा न करें।
- किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।