कोर्ट ने अपराध की गंभीरता देखते हुए जमानत देने से किया इन्कार
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गो-तस्करी में नीट छात्र दीपक के अपहरण और हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश विजय बहादुर यादव की अदालत ने आरोपी जवाहिर यादव की जमानत याचिका खारिज कर दी। आरोपी कुशीनगर जिले के जटहा बाजार थाना क्षेत्र के विशुनपुरा बुजुर्ग गांव का निवासी है। अदालत ने अपराध की गंभीरता, उसकी बर्बरता और सामाजिक प्रभाव को देखते हुए जमानत देने से साफ इन्कार कर दिया।
अभियोजन पक्ष की ओर से विरोध जताते हुए सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि घटना पिपराइच इलाके में 15/16 सितंबर 2025 की रात करीब 11:30 बजे की है। वादी की तहरीर के अनुसार, दो वाहनों पर गाय लादकर आए लगभग दस से बारह गो तस्कर चोरी की नियत से वादी की दुकान में घुस गए। उस समय दुकान पर वादी का भांजा मौजूद था। उसने संदिग्ध गतिविधि देखते ही शोर मचाते हुए मौके से भागकर फोन पर वादी को सूचना दी। सूचना मिलते ही वादी, उसका भाई वीरेंद्र और बेटा दीपक दुकान की ओर दौड़े। जैसे ही वे वहां पहुंचे तभी तस्करों ने पिस्टल तान दी और ईंट-पत्थर से हमला कर दिया। अभियोजन के अनुसार, हमला अत्यंत क्रूर था और बदमाश पूरी तरह संगठित तरीके से आए थे। हमले के बीच ही आरोपी गिरोह के सदस्यों ने वादी के बेटे दीपक को जबरन उठाकर वाहन में डाल लिया और भाग गए। बाद में दीपक की हत्या कर उसका शव फेंक दिया गया।
कोर्ट ने कहा- जवाहिर के आरोप अत्यंत गंभीर
अभियोजन का तर्क था कि मामले में आरोपी जवाहिर यादव सीधे तौर पर घटना में शामिल था। ऐसे में उसे जमानत दिए जाने से न केवल न्याय प्रक्रिया प्रभावित होगी, बल्कि वह साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है और गवाहों को धमका सकता है। अपर सत्र न्यायाधीश ने सभी तथ्यों पर विचार करते हुए कहा कि जवाहिर पर लगाए गए आरोप अत्यंत गंभीर प्रकृति के हैं। प्रथमदृष्टया उसके खिलाफ गंभीर साक्ष्य मौजूद हैं। अपराध की जघन्यता और सामाजिक प्रभाव को देखते हुए अदालत जमानत देने के पक्ष में नहीं है। इसके बाद अदालत ने आरोपी जवाहिर यादव की जमानत अर्जी खारिज कर दी।