बसंतपुर से दुलदुल के पुश्तैनी जंजीरी और मातमी जुलूस की हुई शुरुआत, अलम और दुलदुल की शबीह रही आकर्षण का केंद्र
नौहाख्वानी, सीनाजनी और मातम के जरिए दी गई शोहदा-ए-कर्बला को श्रद्धांजलि
गोरखपुर। मुहर्रम की आठवीं तारीख पर शहर में दुलदुल का कदीमी (पुश्तैनी) जंजीरी व मातमी जुलूस अकीदत और एहतेराम के साथ निकाला गया। हजरत इमाम हुसैन की इस्लाम के लिए दी गई अजीम कुर्बानी की याद में यह जुलूस मरहूम आगा मुख्तार हुसैन के दौलतकदे बसंतपुर से रवाना हुआ। जुलूस नकी रोड, हैदर बाजार, उर्दू बाजार, घंटाघर और रेती चौक होते हुए देर रात गीता प्रेस रोड स्थित इमामबाड़ा रानी अशरफुन्निसा खानम (आगा साहेबान) पहुंचकर संपन्न हुआ।
जुलूस में हजरत अब्बास के अलम और इमाम हुसैन की सवारी मानी जाने वाली दुलदुल की शबीह विशेष आकर्षण का केंद्र रही। रास्ते भर अजादारों ने नौहाख्वानी और मातम कर शोहदा-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
आगा शानदार हुसैन ने बताया कि मुहर्रम की आठवीं तारीख को निकलने वाला यह जुलूस कर्बला की उस ऐतिहासिक घटना की याद दिलाता है, जब 10 मुहर्रम, 61 हिजरी को हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों ने सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। अजादारों ने सीनाजनी, जंजीर और कमा का मातम कर अपने गम और अकीदत का इजहार किया।
जुलूस के दौरान विभिन्न समुदायों के लोगों ने भी शिरकत कर आपसी सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। पूरे मार्ग पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही और धार्मिक माहौल में कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।