गोलघर, रेती, अलीनगर, असुरन, मोहद्दीपुर, घंटाघर जैसे प्रमुख बाजारों में रेडीमेड गारमेंट्स, साड़ियां, लहंगे, कुर्ते और डिजाइनर वस्त्रों की जोरदार बिक्री हो रही है। गोरखपुर का थोक कपड़ा बाजार सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है। देवरिया, महराजगंज, बस्ती, कुशीनगर, संतकबीरनगर सहित पूर्वांचल के तमाम जिलों से व्यापारी बड़ी मात्रा में कपड़े खरीदने गोरखपुर आ रहे हैं।
जीएसटी दरों में सुधार का असर कपड़ा व्यवसाय में दिखने लगा है। त्योहारों की वजह से भी बाजार में रौनक बढ़ गई है। करवाचौथ, दीपावली और सहालग (शादी-ब्याह का समय) की तैयारियों ने बाजार को पूरी तरह से गुलजार कर दिया है। थोक और खुदरा व्यापारी दोनों ही बिक्री से उत्साहित हैं। व्यापारियों का अनुमान है कि इस त्योहारी और विवाह सीजन में गोरखपुर में कुल व्यापार 800 करोड़ रुपये का हो सकता है।
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गोलघर, रेती, अलीनगर, असुरन, मोहद्दीपुर, घंटाघर जैसे प्रमुख बाजारों में रेडीमेड गारमेंट्स, साड़ियां, लहंगे, कुर्ते और डिजाइनर वस्त्रों की जोरदार बिक्री हो रही है। गोरखपुर का थोक कपड़ा बाजार सिर्फ शहर तक सीमित नहीं है।
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देवरिया, महराजगंज, बस्ती, कुशीनगर, संतकबीरनगर सहित पूर्वांचल के तमाम जिलों से व्यापारी बड़ी मात्रा में कपड़े खरीदने गोरखपुर आ रहे हैं। थोक गारमेंट्स और फैब्रिक की दुकानों में सुबह से देर रात तक खरीदारों की भीड़ लगी है।
थोक व्यापारी राजेश नेभानी ने बताया कि इस बार डिमांड उम्मीद से ज्यादा है। नवरात्र में अच्छी बिक्री हुई, अब करवा चौथ और दिवाली की खरीदारी चल रही है। इसके बाद सहालग में और तेजी आएगी।
खुदरा बाजार में ग्राहकों की भरमार
खुदरा बाजारों में भी दिनभर ग्राहकों की चहलकदमी बनी रहती है। महिलाएं करवा चौथ और दिवाली के लिए साड़ियां, सूट और लहंगे खरीद रही हैं, जबकि युवाओं में ब्रांडेड और डिजाइनर गारमेंट्स का खासा क्रेज देखने को मिल रहा है।
दुकानदारों का कहना है कि इस बार परिवार पूरे सेट के साथ खरीदारी कर रहे हैं। रेडीमेड गारमेंट्स विक्रेता नवीन जायसवाल ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार बिक्री में 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हुई है। ग्राहक क्वालिटी के साथ स्टाइल भी देख रहे हैं।
जीएसटी को लेकर व्यापारियों में भ्रम भी
रेडीमेड वस्त्रों पर लागू जीएसटी स्लैब को लेकर व्यापारियों में भ्रम की स्थिति भी बनी हुई है। रेडीमेड गारमेंट्स में 2500 रुपये से कम के कपड़े पर जीएसटी 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दी गई है। इसके ऊपर के लिए 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत हो गया है। एक हजार रुपये से कम के कपड़े पर कोई बदलाव नहीं हुआ है।
व्यापारियों का कहना है कि नियमों की स्पष्ट जानकारी नहीं है, जिससे बिलिंग में दिक्कत हो रही है। हालांकि, इसका असर खरीदारों पर नहीं पड़ा है। चेंबर ऑफ रेडीमेड गारमेंट्स के अध्यक्ष रमाशंकर शुक्ला ने बताया कि कपड़े में अलग-अलग आइटम पर जीएसटी की विभिन्न दरें लागू हैं। इससे थोड़ा कन्फ्यूजन हो रहा है। सरकार को चाहिए कि टैक्स स्लैब पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे। हालांकि, इससे खरीदारी में कोई गिरावट नहीं है।
सहालग में और बढ़ेगा बाजार का ग्राफ
त्योहारी सीजन के बाद नवंबर से सहालग शुरू हो जाएगा। अनुमान है कि इस दौरान शादी-विवाह के परिधानों की जबरदस्त मांग आएगी। दुल्हन की साड़ियां, लहंगे, शेरवानी और पार्टी वियर की खरीदारी से खुदरा बाजार में और तेजी आएगी।
व्यापारी रवि अग्रवाल ने कहा कि त्योहार के साथ-साथ सहालग भी पास में है, इसलिए लोग अभी से खरीदारी कर रहे हैं। शादी के परिधान से जुड़े उत्पादों में अकेले 300 करोड़ रुपये तक का कारोबार संभव है।
नवरात्र से ही बाजार में रौनक बढ़ गई है। अभी करवा चौथ, दिवाली और छठ पर्व के लिए खरीदारी हो रही है। इसके बाद सहालग शुरू हो जाएगा। कपड़े के होलसेल बाजार में 400 करोड़ से अधिक का कारोबार होने का अनुमान है: राजेश नेभानी, अध्यक्ष, चेंबर ऑफ टेक्सटाइल्स सोसाइटी
त्योहारी सीजन में बाजार गुलजार है। जीएसटी स्लैब में बदलाव के बाद कपड़े के रेट में कोई खास फर्क नहीं पड़ा है। एक रेंज के कपड़े सस्ते हुए तो दूसरे के बढ़ गए। त्योहार या सहालग में बिकने वाले कपड़ों पर जीएसटी बढ़ गई है: अमित टिबड़ेवाल, जिलाध्यक्ष, पूर्वांचल व्यापार एसोसिएशन