गोरखपुर शहर के रामगढ़ताल परियोजना क्षेत्र स्थित 42.5 एकड़ में फैली वाटर बॉडी को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) एक बार फिर टेंडर निकालेगा। दरअसल रामगढ़ताल परियोजना क्षेत्र के लिए पूर्व में जिन 12 गांवों की जमीन अधिगृहीत की गई है, वहीं की समिति को वाटर बॉडी की सफाई, सुंदरीकरण एवं देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी जानी है।
पूर्व में जो टेंडर निकाला गया था उसमें इन गांवों की एक समिति तो एक बाहरी फर्म ने भी आवेदन कर रखा था। 12 गांवों में से ही दो आवेदन जरूरी है लिहाजा फिर से टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
काम जिस समिति को आवंटित होगा उसे पांच साल के लिए मछली पालन के लिए करीब 20 लाख रुपये जमा करने होंगे। वहीं फर्म इस वाटर बॉडी में बोटिंग आदि संसाधनों से अपना खर्च निकालेगी। वाटर बॉडी के सुंदरीकरण कार्य को जीडीए बोर्ड की तरफ से मंजूरी मिल चुकी है। जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने कहा कि टेंडर में दो फर्म ने आवेदन किया था।
रामगढ़ताल परियोजना क्षेत्र के लिए जिन 12 गांवों से जमीन अधिगृहीत की गई है, वहीं की समिति को काम मिलना है। दो आवेदन जरूरी है मगर पूर्व में हुए टेंडर में जो दो आवेदन पड़े थे उनमें से एक तो इन गांवों से था लेकिन दूसरा आवेदन किसी बाहरी फर्म ने कर रखा था। ऐसे में दोबारा टेंडर निकाला जा रहा है। 15 दिन के भीतर टेंडर प्रक्रिया पूरी कर वाटर बॉडी के सुंदरीकरण का काम शुरू करा दिया जाएगा।
रामगढ़ताल के पास है सात वाटर बॉडी
रामगढ़ताल के पास बौद्ध संग्रहालय से लेकर सर्किट हाउस होते हुए पैडलेगंज के पास तक के क्षेत्र में करीब सात वाटर बॉडी है। इन्हीं में से सुंदरीकरण के लिए चयनित यह वाटर बॉडी सर्किट हाउस के पीछे, ऐश्प्रा समूह की ओर से विकसित किए जा रहे होटल एवं अंबेडकर पार्क के सामने तक फैली है। वाटर बॉडी के ज्यादातर हिस्से में जलकुंभी फैली हुई है। चयनित फर्म को इसे साफ कराना होगा। इसके बाद वह वहां मछली पालन व बोटिंग आदि शुरू करा सकती है। वाटर बॉडी की सफाई व सुंदरीकरण हो जाने से आस-पास के इलाकों की खुबसूरती भी बढ़ जाएगी।