कूड़े से सीएनजी बनाने के लिए पूरी तरह से गीले कूड़े की आवश्यकता होती है। अगर गीले कूड़े के साथ थोड़ा सा भी सूखा कूड़ा रह जाएगा तो इस प्लांट के लिए लगी मशीनों के खराब होने की आशंका रहती है। इस वजह से नगर निगम को हर हाल में सिर्फ गीला कूड़ा ही उपलब्ध कराना होगा।
देनी होगी सिर्फ जमीन, कंपनी करेगी निवेश
इस प्लांट को लगाने के लिए नगर निगम को कुछ निवेश नहीं करना होगा, सिर्फ जमीन उपलब्ध करानी होगी। सामान्य तौर पर इस प्लांट को लगाने में करीब 150 करोड़ रुपये का निवेश करना पड़ता है। इसके बाद कंपनी गीले कूड़े से सालाना करोड़ों रुपये कमाती है। इंदौर में प्लांट लगाने वाली कंपनी इस प्लांट से सालाना करीब 25 करोड़ रुपये की कमाई कर रही है। साथ ही इंदौर नगर निगम को रॉयल्टी के रूप में ढाई करोड़ रुपये दे रही है।
इसी सीएनजी से चलती हैं नगर निगम इंदौर की गाड़ियां
प्रोजेक्ट के अनुसार कंपनी द्वारा बनाई जाने वाली इसी सीएनजी से नगर निगम इंदौर की गाड़ियां चलती हैं। कंपनी 50 प्रतिशत सीएनजी नगर निगम को उपलब्ध कराती है। बाकी व्यावसायिक इस्तेमाल के तौर पर इंडस्ट्री और कामर्शियल वेंडरों को देती है। साथ ही जो लिक्विड खाद तैयार की जाती है उसे रासायनिक खाद कंपनियों के माध्यम से किसानों को उपलब्ध कराया जाता है।