कोरोना संक्रमण के मामले अब बेहद कम हो चुके हैं। ऐसे में क्षय यानि ट्युबरक्लोसिस (टीबी) मरीज कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए टीका लगवा सकते हैं। कोविड के टीके का टीबी मरीजों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं है। टीबी के सामान्य मरीज टीका लगवा सकते हैं, लेकिन टीबी के गंभीर लक्षणों वाले मरीज और मॉस ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) मरीज डॉक्टर से सलाह के बाद ही टीका लगवाए।
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. रामेश्वर मिश्र ने बताया कि जिले में 6000 टीबी रोगी है। यह रोगी कोविड का टीका लगवा सकते हैं। बताया कि फेफड़ों की टीबी के मरीजों को कोविड होने पर ज्यादा परेशानी हो सकती है। इसलिए ऐसे मरीजों का टीकाकरण बेहद जरूरी है। कोई भी टीबी रोगी इस भ्रांति का शिकार न हो कि उसको टीका लगने से कोई बुरा असर पड़ेगा।
कहा कि टीका लगवाने के बाद कुछ लोगों को हल्का बुखार और दर्द हो सकता है, जिससे बिल्कुल घबराना नहीं है। टीका केवल उन्हीं टीबी रोगियों को नहीं लगवाना चाहिए जिनको तेज बुखार है या फिर कोविड के लक्षण हो। कोविड टीका पूरी तरह से सुरक्षित है। टीके की दोनों डोज आवश्यक है। कोवाक्सिन की दूसरी डोज चार से छह सप्ताह के अंतराल पर, जबकि कोविशील्ड की दूसरी डोज 12 से 16 सप्ताह के अंतराल पर लगवानी है।
625 मंगल दलों से टीकाकरण में लिया जाएगा सहयोग
गोरखपुर जिले में टीकाकरण की गति बढ़ाने के लिए ब्लॉकों में सक्रिय युवक व महिला मंगल दल का भी सहयोग लिया जाएगा। जिले में ऐसे कुल 625 मंगल दल सक्रिय हैं। जिनमें 343 युवक व 282 महिला मंगल दल हैं। इन दलों के पदाधिकारियों का यूनिसेफ के सहयोग से शुक्रवार को वर्चुअल अभिमुखीकरण किया गया।
यह पदाधिकारी मंगल के अन्य सदस्यों को संवेदीकृत करेंगे और सभी लोग कलस्टर स्तर पर लाभार्थियों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करेंगे। यूनिसेफ के डीएमसी गुलजार त्यागी ने कोविड के बारे में विस्तार से जानकारी दी और बताया कि बीमारी के बारे में सिर्फ प्रामाणिक स्रोतों का ही सहारा लें। जिला युवा कल्याण अधिकारी अमित कुमार सिंह ने मंगल दलों से अपील की, कि वे लोगों के मन से टीकाकरण की भ्रांतियों को दूर करके उन्हें अभियान से जोड़ें। ब्यूरो