गोरखपुर। शाहपुर थाना क्षेत्र के घोषीपुरवा में मां-बेटी की हत्या के 11 दिन बाद भी पुलिस शून्य पर है। जांच टीम को जिन संदिग्ध बाइक सवार युवकों पर शक था, वे कैटरिंग कर्मचारी निकले। दोनों युवक गली में खाना पहुंचाने आए थे। पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें छोड़ दिया। साथ ही वारदात की रात घर के चार किराएदारों और आसपास के तीन परिवारों की गैरमौजूदगी ने भी पुलिस को शुरू में शक के घेरे में लाया, लेकिन घंटों की पूछताछ के बाद पुलिस को उनके खिलाफ भी कोई ठोस सुराग नहीं मिला।
पुलिस की जांच में सामने आया कि हत्याकांड की रात मकान में रहने वाले चार किराएदारों में से तीन बाहर गए हुए थे। जबकि एक महिला अपने कमरे में अकेली थी। इससे पुलिस को लगा कि वारदात ऐसे समय में हुई, जब घर में कम लोग मौजूद थे, और शायद हत्यारा इस बात से परिचित था। दूसरी ओर आस-पड़ोस के तीन परिवार भी उस रात अपने घरों में मौजूद नहीं थे, जो पुलिस के लिए संदेह का कारण बना।
सीओ गोरखनाथ रवि सिंह बताते हैं कि यह संयोग बेहद असामान्य था कि वारदात के वक्त न सिर्फ घर खाली था, बल्कि आसपास के कई लोग भी मौजूद नहीं थे। इसीलिए पुलिस ने सभी को हिरासत में लेकर पूछताछ की। कई घंटों तक पूछताछ के बाद भी पुलिस को न तो हत्या की वजह मिली और न ही किसी की भूमिका संदिग्ध पाई गई। इसके बाद सभी को छोड़ दिया गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, अब तक जुटे तथ्यों में ऐसा कोई ठोस एंगल नहीं मिला है, जिससे हत्यारे तक पहुंचा जा सके। घटनास्थल से भी कोई अहम सबूत नहीं मिले। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी ऐसा कुछ नहीं है, जो किसी विशिष्ट दिशा में जांच को आगे बढ़ा सके। पुलिस अब इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, मोबाइल लोकेशन और इलाके में लगे निजी सीसीटीवी कैमरों के फुटेज को फिर से खंगाल रही है।
जांच आगे बढ़ती है तो हर बिंदु ब्लाइंड में बदल जाता है। कोई सुराग हाथ नहीं आ रहा है। हत्यारे ने बेहद सोच-समझकर वारदात को अंजाम दिया है। ऐसा लगता है कि वह घटना के समय की लोकेशन व परिस्थितियों से भलीभांति परिचित था। पुलिस टीमें लगातार हर बिंदु पर जांच कर रही है। जल्द ही वारदात का पर्दाफाश किया जाएगा।
- अभिनव त्यागी, एसपी सिटी