विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार पांच वर्ष पहले परिसर में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर 7,040 छात्राएं नामांकित थीं। अब यह संख्या बढ़कर 10,530 हो गई है। इसी अवधि में कुल छात्र नामांकन 14,151 से बढ़कर 18,855 पहुंच गया। यानी कुल नामांकन में हुई वृद्धि का बड़ा हिस्सा छात्राओं की बढ़ती भागीदारी से आया है।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में उच्च शिक्षा के प्रति बेटियों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। पिछले पांच वर्षों में विश्वविद्यालय परिसर में छात्राओं की संख्या करीब 50 प्रतिशत बढ़ गई है। वर्ष 2021 के मुकाबले अब परिसर में 3,490 अधिक छात्राएं पढ़ाई कर रही हैं।
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यह बदलाव सिर्फ विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित नहीं है, बल्कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के संबद्ध महाविद्यालयों में भी छात्राओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। विश्वविद्यालय के आंकड़ों के अनुसार पांच वर्ष पहले परिसर में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर 7,040 छात्राएं नामांकित थीं।
अब यह संख्या बढ़कर 10,530 हो गई है। इसी अवधि में कुल छात्र नामांकन 14,151 से बढ़कर 18,855 पहुंच गया। यानी कुल नामांकन में हुई वृद्धि का बड़ा हिस्सा छात्राओं की बढ़ती भागीदारी से आया है।
उच्च शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की विभिन्न योजनाएं, बेटियों की शिक्षा के प्रति बढ़ती जागरूकता, बेहतर परिवहन सुविधा, छात्रवृत्ति और विश्वविद्यालय में विकसित हो रही शैक्षणिक सुविधाएं इस बदलाव की प्रमुख वजह हैं।
नई शिक्षा नीति के बाद रोजगारपरक और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में भी छात्राओं की रुचि बढ़ी है। यही रुझान जारी रहा तो आने वाले वर्षों में विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में छात्राओं की संख्या कई पाठ्यक्रमों में छात्रों के बराबर या उससे अधिक भी हो सकती है। यह बदलाव क्षेत्र में सामाजिक और शैक्षणिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
विश्वविद्यालय से संबद्ध शहरी और ग्रामीण महाविद्यालयों में भी पिछले तीन से पांच वर्षों के दौरान छात्राओं का नामांकन बढ़ा है या स्थिर बना हुआ है। इससे स्पष्ट है कि पूर्वांचल में बेटियां अब उच्च शिक्षा को लेकर पहले से अधिक जागरूक और आत्मविश्वासी हुई हैं।
सुविधाएं बढ़ी हैं, परिवार का समर्थन भी मिल रहा
विश्वविद्यालय में बढ़ती सुविधाएं, सुरक्षित परिसर, परिवार का समर्थन, रोजगारपरक पाठ्यक्रम की शुरुआत और लैंगिक समानता के अवसर जैसी वजहों से उच्च शिक्षा में छात्राओं की संख्या बढ़ी है: प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय
घर-सरकार से प्रोत्साहन मिल रहा
लड़कियां केंद्रित होकर पढ़ाई कर रही है। माता-पिता के साथ ही अब उनको सरकार से भी प्रोत्साहन मिल रहा है। घर से लेकर कैंपस तक मिल रहा बेहतर माहौल उनके लिए प्रेरणा का काम कर रहा है। छात्राएं जब उच्च शिक्षा के लिए घर से निकल सकती हैं तो नौकरी के लिए शहर भी छोड़ने में उनको कोई हिचक नहीं होगी: प्रो. कीर्ति पांडेय, पूर्व अध्यक्ष समाजशास्त्र, गोरखपुर विश्वविद्यालय
आगे की बात : मेक इंडिया के लिए करना होगा तैयार
सिर्फ शिक्षित करने भर से कुछ नहीं होगा। प्रशिक्षण देकर इनको मेक इन इंडिया के लिए तैयार करना होगा। कौशल विकास से पहले रोजगार के अवसर पैदा करने होंगे। नामांकन और कक्षा में उपस्थिति के अंतर को कम करने की भी जरूरत है।
नई शिक्षा नीति को पूरी तरह से लागू करके ही उच्च शिक्षित युवा वर्ग को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों को सेंटर ऑफ प्रॉफिट के बजाए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने पर फोकस करना होगा: रश्मि रंजन, कॅरिअर काउंसलर