वैशाली सुपरफास्ट ट्रेन को देवरिया स्टेशन पर रोका गया। यह ट्रेन पौने सात घंटे देरी से रात 11.30 बजे गोरखपुर स्टेशन पहुंची। इसे पूरी सुरक्षा के बीच रवाना किया गया। ट्रेन के आते ही बोगियों में चढ़ने के लिए भी यात्रियों में धक्कामुक्की हुई। जबकि बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस को छपरा स्टेशन पर रोका गया था।
इस ट्रेन के रात करीब डेढ़ बजे आने की सूचना प्रसारित की गई। वहीं सत्याग्रह एक्सप्रेस को निरस्त कर दिया गया लेकिन इसकी सूचना यात्रियों को स्टेशन पर लगे डिस्पले बोर्ड पर नहीं दी गई। जबकि इस ट्रेन को ऑनलाइन निरस्त दिखाया गया। इसके बाद यात्री परेशान हो गए। सामान लेकर इधर-उधर भागने लगे। उन्हें रेल प्रशासन की ओर से सही जानकारी नहीं मिल पाई। ज्यादातर यात्री देर रात तक ट्रेन के आने का इंतजार करते रहे।
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बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस शाम पौने चार बजे आती है। इस ट्रेन के रात में डेढ़ बजे आने की सूचना दी गई। इसी प्रकार नई दिल्ली-न्यू जलपाई गुड़ी ट्रेन के रात में ढाई बजे गोरखपुर जंक्शन पर पहुंचने प्रसारित की गई। इसके चलते यात्रियों को काफी दुश्वारियों का सामना करना पड़ा।
गोरखपुर कैंट स्टेशन पर यार्ड रिमाडलिंग व तीसरी लाइन बिछाने के लिए लिए गए मेगा ब्लॉक का रविवार को अंतिम दिन था। शनिवार की पूरी रात काम होने पर भी कुछ काम अधूरा रह गया। इसके चलते रविवार को दोपहर 12 बजे से रात में 10.30 बजे तक सुपर मेगा ब्लॉक लिया गया था। इस वजह से बनारस से चलने वाली कृषक एक्सप्रेस गोरखपुर में ही कैंसिल कर रात में 11.03 बजे यहीं से प्लेटफार्म नंबर 2 से चलाई गई।
नई दिल्ली के लिए जाने वाले कई यात्री ट्रेनों के देर से आने के चलते परेशान हो गए थे। टिकट काउंटर पर अपना टिकट रद्द कराने के लिए धक्का-मुक्की करते नजर आए। देवरिया, कुशीनगर और महराजगंज के दूरदराज इलाकों से आए लोग घर वापसी का इंतजाम नहीं होने के चलते स्टेशन परिसर में फर्श पर ही सो गए। वहीं, कुछ लोग स्टेशन के बाहर बिहार जाने वाली बसों व प्राइवेट गाड़ियों के चालकों से बात कर गंतव्य को जाने के लिए परेशान दिखे।
पूछताछ काउंटर पर लगी थी भीड़, परेशान रहे यात्री
ट्रेनों के विलंब होने की सूचना ही बार अलग-अलग दी गई। बार-बार समय परिवर्तन से यात्री परेशान हो गए। पूछताछ काउंटर पर लोग एक दूसरे से धक्कामुक्की कर रहे थे। हालांकि स्टेशन परिसर में लगे एलईडी स्क्रीन पर ट्रेनों के बारे में सूचनाएं प्रसारित हो रही थीं, लेकिन लोग संतुष्ट होने के लिए पूछताछ काउंटर पर जा रहे थे।
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बोले यात्री
ट्रेनों के देर से चलने या रद होने की कोई सूचना पहले से नहीं दी गई थी। स्टेशन आने पर पता लगा कि सभी ट्रेनें रात 10 बजे के बाद चलेंगी। मुझे बरेली जाना है, लेकिन यह पता नहीं चल पा रहा है कि सत्याग्रह आज जाएगी या नहीं। स्टेशन पर इसकी जानकारी मिलनी चाहिए।
-शाहिद अली , कुस्महीं।
महीने भर हो गए, कभी ट्रेन देर से जाएगी तो कभी इसके निरस्त होने की जानकारी मिलती रहती है। एक तो वैसे ही गोरखपुर से दिल्ली जाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है, ऊपर से यह नई मुसीबत आ गई है। आज दूसरी बार स्टेशन से वापस लौट रहा हूं।
-आफताब सोनबरसा।
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अगर यात्री देर से पहुंचे और ट्रेन छूट जाए तो सारा दोष यात्री का ही होता है। लेकिन अगर ट्रेन लेट हो जाए तो रेलवे इसके बदले यात्रियों को कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं देता। वैशाली पांच घंटे लेट थी तो कम से कम कन्फर्म टिकट वालों के लिए भोजन-नाश्ते का ही प्रबंध करा देते।
-लविश, देवरिया।
परिवार के साथ दिल्ली जा रहे थे। बिहार संपर्क क्रांति का टिकट लिया था। यहां आने पर पता लगा कि ट्रेन का लोकेशन दोपहर से ही छपरा दिख रहा है। रात में 9 बजे बताया गया कि अब 12 बजे के बाद आएगी। मजबूरी में स्टेशन पर ही रात बितानी होगी।
-अयान, देवरिया।