दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में संचालित स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम के छात्र किताब के लिए विभाग और केंद्रीय ग्रंथालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। वह किताब के लिए केंद्रीय ग्रंथालय जा रहे हैं तो उनको मायूसी मिल रही है। वहां उनको किताब देने से मना करने के साथ विभाग से संपर्क करने की सलाह दी जा रही है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय में स्ववित्तपोषित के वर्तमान में 40 पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। कृषि संस्थान, एमबीए, इंजीनियरिंग, बीबीए, बीएएलएलबी, बीएजेएमसी आदि के कोर्स स्ववित्तपोषित के रूप में संचालित किया जा रहा है। इस पाठ्यक्रम में पढ़ाई करने वाले छात्रों से विश्वविद्यालय प्रशासन रजिस्ट्रेशन शुल्क के साथ माेटी रकम शुल्क के रूप में लिया जाता है। स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय की आय का प्रमुख स्रोत है।
बावजूद इसके स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में पढ़ने वालों को परंपरागत छात्रों के समान सुविधा नहीं दी जाती। उनसे लाइब्रेरी शुल्क भी वसूला जाता है। स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रम में छात्र जब किताब के लिए केंद्रीय ग्रंथालय पहुंच रहे हैं तो उनको किताब देने से मना कर दिया जा रहा है। जिम्मेदार विभाग से संपर्क करने की बात कह कर उनको भेज दिया जा रहा है। परेशान छात्र विभाग पहुंच रहे हैं तो वहां भी उनको मायूसी ही मिल रही है।