एक दिन पहले स्कूल की एक अध्यापिका ने किशोर के छोटे भाई की पिटाई कर दी थी। आरोप है कि पिटाई का विरोध करने पर किशोर और उसके भाई को स्कूल से भगा दिया गया था।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के ग्रामसभा कुसहरा में स्कूल से घर लौटे किशोर शिवम पांडेय (15) ने खुद को कमरे में बंद कर फांसी लगा ली। आरोप है कि आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले इस किशोर व उसके छोटे भाई को एक दिन पहले ही स्कूल से भगा दिया गया था।
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परिजनों की सूचना पर मौके पर पहुंची चिलुआताल पुलिस ने कमरे का दरवाजा तोड़कर नायलॉन की रस्सी से लटके शव को उतारा। फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किशोर की मौत का कारण फांसी के चलते दम घुटना बताया गया है। मौके से सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें किशोर ने स्कूल की एक अध्यापिका पर अपने छोटे भाई को अकारण पीटने व प्रबंधक पर खुद व छोटे भाई को स्कूल से निकालने का आरोप लगाया है। किशोर के पिता ने चिलुआताल पुलिस को दी तहरीर में स्कूल प्रबंधक जंगी शर्मा, शिक्षिका गोल्डी और प्रधानाचार्य बालकृष्ण यादव पर प्रताड़ित करके आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया है और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
जानकारी के मुताबिक, ग्राम सभा कुशहरा निवासी त्रिपुरारी पांडेय का बेटा शिवम पांडेय आदर्श बाल विद्या मंदिर जूनियर हाईस्कूल खुटवा मजनूं चौराहा में आठवीं कक्षा का छात्र था। शिवम का छोटा भाई सुंदरम भी इसी स्कूल में छठीं कक्षा में पढ़ता है। शनिवार सुबह नौ बजे शिवम घर से स्कूल के लिए निकला था, लेकिन एक घंटे बाद ही वापस आ गया। सुबह करीब 10 बजे खपरैल वाले मकान के एक कमरे में गया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। पुलिस के मुताबिक किशोर ने घर के ऊपरी हिस्से में लगी सहतीर (मोटी लकड़ी) से नायलॉन की रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। कुछ देर बाद जब परिजनों की नजर बंद दरवाजे पर पड़ी तो उसे खुलवाने का प्रयास किया। अंदर से कोई जवाब नहीं मिला तो चिलुआताल पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर शव को उतारा। फोरेंसिक टीम ने कमरे का मुआयना किया तो वहां रोलदार पेपर पर एक सुसाइड नोट मिला है। मौके पर पहुंचे एसपी नार्थ मनोज कुमार अवस्थी ने परिजनों के अलावा संबंधित स्कूल के प्रबंधक से भी जानकारी ली है।
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और मैं फांसी जंगी के लिए लगा रहा हूं : शिवम पांडेय
शिवम की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
घटनास्थल से पुलिस को सुसाइड नोट मिला है। इसमें लिखा है कि कल मेरे भाई सुंदरम को मैडम गोल्डी मार रही थीं। आरोप लगा रही थीं कि सुंदरम इधर-उधर ताकता है। तब भी मैंने कुछ नहीं बोला, लेकिन जब उन्होंने उसके सर पर मारा और वह रोने लगा। तब मैंने बोला, क्यूं मार रही हैं? इस पर मैडम ने कहा कि मारूंगी। मैंने, कहा मत मारिए। आपको विश्वास नहीं है तो प्रधानाचार्य बालकिशुन सर से पूछ लें। लेकिन, जंगी सर (स्कूल प्रबंधक जंगी शर्मा) ने केवल हमको और हमारे भाई को स्कूल से खदेड़ दिया और कहा जाओ अपने बाप को बुला लाओ। और मैं फांसी जंगी के लिए लगा रहा हूं। शिवम पांडेय
जानकारी मिलते ही बंद हो गया स्कूल
घटना की जानकारी होते ही आदर्श बाल विद्या मंदिर में छुट्टी कर दी गई। स्कूल का स्टाफ मोबाइल बंद करके घर चला गया। घटना की छानबीन में जुटी पुलिस ने स्कूल प्रबंधक को पूछताछ के लिए पुलिस चौकी पर बुलाया। हालांकि, देर शाम प्रबंधक को बिना किसी कार्रवाई के छोड़ दिया गया।
देरशाम किशोर का अंतिम संस्कार
किशोर के पिता त्रिपुरारी पांडेय ने मामले की सूचना चिलुआताल पुलिस को दी और पोस्टमार्टम कराने की मांग रखी थी। पुलिस ने किशोर का पोस्टमार्टम कराया और शव परिजनों को सौंप दिया। देर शाम रोहिन नदी के शेखपुरवा घाट पर किशोर का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
प्रबंधक, प्रधानाचार्य व शिक्षिका के खिलाफ तहरीर
किशोर के पिता त्रिपुरारी पांडेय ने स्कूल प्रबंधन पर प्रताड़ना का आरोप लगाया है। चिलुआताल पुलिस को दी तहरीर में लिखा है कि स्कूल के प्रबंधक जंगी शर्मा, शिक्षिका गोल्डी और प्रधानाचार्य बालकृष्ण यादव ने शिवम को शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करके आत्महत्या के लिए उकसाते थे। प्रताड़ना से तंग आकर शिवम ने आत्महत्या कर ली। मामले में केस दर्ज करके कार्रवाई की जानी चाहिए।
प्रबंधक/शिक्षिका शांति शर्मा ने कहा कि शुक्रवार को स्कूल में बदमाशी करने पर एक बच्चे को टीचर ने समझाया था। उसकी पिटाई की बात गलत है। शनिवार को बच्चा स्कूल नहीं आया था। दोपहर में उसके आत्महत्या की जानकारी हुई। अपने स्कूल के बच्चे की मौत से स्कूल प्रबंधन मर्माहत है।
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि बच्चे ने आत्महत्या कर ली है। शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा गया है। मामले की छानबीन की जा रही है। अगर स्कूल प्रबंधन या अध्यापक के दोषी होने की बात सामने आती है तो केस दर्ज कर कार्रवाई होगी।
बोले विशेषज्ञ
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित शाही ने बताया कि छात्र की तरफ से उठाए गए आत्मघाती कदम का प्रमुख कारण आवेश हो सकता है। लोगों में तनाव झेलने की क्षमता कम होती जा रही है। जब समस्या का समाधान नहीं सूझता है तभी व्यक्ति आत्महत्या जैसा निर्णय लेता है। सबसे पहले परिवार को इस पर ध्यान देना होगा। बच्चों को तनाव झेलने के लिए मजबूत बनाना होगा। इसके लिए जरूरी है कि माता-पिता व अध्यापक बच्चों के साथ मित्रवत संबंध रखें।
समाज शास्त्री डॉ. अनुभूति दूबे ने बताया कि ऐसी घटनाओं में उम्र मायने नहीं रखती। इसलिए हमें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। जब कोई व्यक्ति परिवार या समाज में खुद को अकेला पाता है, तभी वह आत्महत्या जैसा कदम उठाता है। ऐसी घटनाएं समाज में नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। इसलिए समाज के प्रबुद्ध व जिम्मेदार लोगों को इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रयास करना होगा।