वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के जंगल में बाघ, तेंदुआ, बंदर, लंगूर ,हिरण, सांभर, भालू, गौर, जंगली कुत्ता, घड़ियाल, मगरमच्छ ,नीलगाय, मोर, पहाड़ी बुलबुल ,पहाड़ी तोता सहित दर्जनों दुर्लभ प्रजाति के जीव यहां देखने को मिल जाएंगे।
पर्यटकों को हो रहा बाघों का दीदार
जंगल सफारी के क्रम में पर्यटकों को बाघों का दीदार रोमांच एवं कौतूहल पैदा करता है। हालांकि बगहा वाल्मीकि नगर मुख्य पथ पर सड़क के बीचों-बीच अक्सर बाघ दिख जाता है। गनौली, हरनाटांड, मदनपुर आदि के जंगलों में झरना नदियां दलदल आदि प्राकृतिक जैव विविधता का एहसास अपने आप में अनूठा है।
ले सकते हैं ट्री हट का मजा
ट्री हट के माध्यम से कम खर्च पर पर्यटक प्रकृति को करीब से देख व महसूस कर सकते र्है। वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना के जंगल घूमने के लिए विभाग की ओर से वाहन एवं गाइड उपलब्ध कराए जाते हैं, जो जंगल सफारी के आनंद को दोगुना देते हैं। गंडक नदी के जलाशय में नौका विहार का अलग ही मजा है। गंडक के शांत पानी को चीरते हुए जब मोटर बोट आगे बढ़ती है तो रोमांच अपने चरम पर होता है।
गंडक नदी में मिलते हैं जीवित शालिग्राम
आचार्य दिवाकर मणि ने बताया कि गंडक नदी के तट पर बालू में शालिग्राम मिलता है। शास्त्रों के मुताबिक भारत में दो संगम हैं। इनमें पहला प्रयागराज तथा दूसरा वाल्मीकिनगर। वाल्मीकि रामायण में वर्णित सोनभद्र, ताम्र भद्र एवं नारायणी के पवित्र मिलन को त्रिवेणी संगम कहा गया है।
यहां ठहरने का इंतजाम
गंडक नदी के तट पर जंगलों के बीच बने होटल वाल्मीकि बिहार, जंगल कैंप परिसर में बने बंबू हट, फोर फ्लैट के अलावा वाल्मीकि नगर, गनोली, नौरंगिया, गोवर्धना, मदनपुर, दोन,मंगुराहा आदि जगहों पर वन विभाग के रेस्ट हाउस उपलब्ध हैं। वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना का दीदार करने के लिए सड़क एवं रेल मार्ग दोनों से पहुंचा जा सकता है। पर्यटक चाहे तो निजी वाहन से भी आ सकते हैं।