करीब 50 वर्ष पहले क्षेत्र में भयंकर सूखा पड़ा था। किसानों के फसल सूख कर नष्ट हो गए थे। लोग मंदिर में पहुंचे और दूध, जल चढ़ाया। सुबह से लेकर शाम तक शिवलिंग को दूध और जल से डूबा दिए। इस दौरान काला नाग निकला और उसी जल में तैरने लगा। शाम होते ही नाग विलुप्त हो गए। उसके बाद रात में खूब बारिश हुआ। तभी से जब भी क्षेत्र में सूखा पड़ता है तो लोग बउरहवा बाबा की शरण में जाते हैं।
मंदिर के पुजारी राम आसरे ने बताया कि मंदिर की अलग महत्व है, सच्चे मन से मांगी गई सभी मनौती पूर्ण होती है।
ग्राम प्रधान विनोद चौधरी ने जर्जर मंदिर को भव्य रूप देने के लिए मंदिर को करीब सात लाख की लागत से जीर्णोद्धार कराया। प्रधान ने कहा कि शिव में गहरी आस्था है। इस लिए मंदिर को भव्य रूप दिया। शिवरात्रि के दिन क्षेत्र के कई जिलों के लोग यहां जल चढ़ाने पहुंचते हैं।