बर्डपुर वास्तव में अंग्रेज जमींदारों की रियासत थी, जिसमें 14 मौजे थे। आज भी इन मौजों को इनके क्रमांक से जाने जाते हैं। बर्डपुर स्टेट की स्थापना 1832 में की गई थी। जेजे मैकलाचलन इसके जमींदार थे। इनका स्वामित्व 50 वर्ष के लिए एलेक्जेंडर एंड कंपनी कोलकाता को सौंपा गया, पर यह फर्म पट्टे की शर्त को पूरा नहीं कर सकी।
एक मार्च 1934 में यह संपत्ति डब्लू एफ गिब्बन और के काका को बेच दिया। वर्ष 1948 में रियासत का प्रबंध देख रहे एच. गिब्बन की मृत्यु हो गई। उसके एक वर्ष तक उनकी पत्नी ने प्रबंध संभाला। मिसेज गिब्बन ने डब्लू पेपे को रियासत का प्रबंधक बनाया और बाद में फिर उन्हीं से शादी कर ली। बर्डपुर स्टेट के स्वामियों की अंतिम पीढ़ी थी।
दोनों भवनों की देखरेख बर्डपुर और दुल्हा कोठी को क्रमश: सिंचाई और लोक निर्माण विभाग ने अपने कब्जे में ले रखा है। कभी इन भवनों में अंग्रेजी शासकों और जमींदारों की शान में कसीदे पढ़े जाते थे। मौजूदा समय में इन भवनों की दशा जर्जर हो गई है। जय किसान इंटर कॉलेज के पूर्व प्रधानाचार्य चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव कहते हैं कि इतिहास के साक्षी रहे भवनों को सुरक्षित और संरक्षित करने का काम हो रहा है, पर जिले में ऐतिहासिक हवेलियों पर किसी की नजर नहीं है।