जांच किया गया तो पता चला कि कपिलवस्तु के संदीप खत्री और अमन एक पीसीओ की मदद से फोन कर रहे थे मगर उनका कोई खास लेना-देना नहीं था। पुलिस नेपाल में दो दिन तक पूछताछ करने के बाद भी खाली हाथ रही।
इसी बीच पुलिस के हाथ उन लोगों का नाम लग गया जिसने अपहरण किए थे वह उस समय के अपराध के बड़े नाम थे। राधे यादव, जयेश यादव और राकेश। पुलिस की तलाश तीन दिन बाद खत्म हुई और नारायणी नदी के किनारे बिहार बॉर्डर पर अपहरण करने वाले दबोचे गए।
पुलिस ने सकुशल उद्योगपति को छुड़ा लिया और बाद में बदमाश मुठभेड़ में मार गिराए गए थे। यह वह घटना है जिसके बाद पुलिस ने अपने तंत्र को मजबूत करने की योजना बनाई और फिर उस पर काम भी हुआ धीरे-धीरे सर्विलांस इतना मजबूत हो गया कि किसी भी घटना को छुपा पाना बदमाशों के लिए टेढ़ी खीर हो चुकी है।