डॉ. अजय रावत ने बताया कि राजनीति शास्त्र में पीएचडी करने के बाद उन्होंने कुछ अलग करने की कोशिश की। उन्होंने इंडियन पोल्ट्री इंस्टीट्यूट पुणे से डिप्लोमा करने के साथ कई नेशनल सेमिनार में जानकारी ली। इसके बाद उन्होंने प्रोजेक्ट शुरू किया। वर्ष 2017 में वे बैंकॉक में हुए इंटरनेशनल सेमिनार में प्रशिक्षण लेने गए थे। उन्होंने बताया कि यूनिट में अमेरिकन बर्ड के चूजे पैदा किए जाते हैं, जिसमें मांस ज्यादा होता है।
21 दिन में अंडे से निकलते हैं चूजे
अमेरिकन बर्ड के पैरेंट्स चूजे की कीमत करीब 350 रुपये होती है। एयरकंडीशन के माध्यम से मुर्गियों को 29 से 31 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाता है। मुर्गी जब अंडे देने की स्थिति में होती है तो उसकी कीमत 1650 तक पहुंच जाती है। एक मुर्गी 18 माह तक अंडे देती है। औसतन वे 142 चूजे पैदा करती हैं। उसके बाद मुर्गियों को मीट प्रोसेसिंग यूनिट में बेच दिया जाता है। एक मुर्गी 6.5 से 7 किग्रा की होती है। यूनिट के ऑपरेटर ट्रे में अंडे रखकर मशीन में सेट कर देते हैं। हैचरी में 21 दिन बाद उसमें चूजे तैयार हो जाते हैं, आवश्यकतानुसार तापमान में रखा जाता है तो चूजे बाहर निकल जाते हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वेदव्रत गंगवार ने बताया कि बर्डपुर में पूर्वांचल की सबसे अधिक क्षमता वाली हैचरी है। इसमें प्रबंधन और साफ-सफाई बेहतर होती है। इसके संचालक विदेशी तकनीकी को भी अपनाने में सक्रिय रहते हैं। आधा दर्जन से अधिक जिले में दो हजार से अधिक लोगों को इस प्रोजेक्ट से रोजगार मिल रहा है।