कक्षा नौ तक पढ़े, भूमिहीन बुजुर्ग शरदचंद शुक्ला की पेंशन समाज कल्याण विभाग ने उन्हें पूर्व प्रोफेसर बता कर बंद कर दी। लाभ से वंचित होने के कारण आर्थिक तंगी का शिकार पीड़ित बुजुर्ग की पत्नी ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है।
सहजनवां के हरपुर बुदहट गांव निवासी शरदचंद शुक्ला की पत्नी आशा के मुताबिक पति को तीन साल से वृद्धावस्था पेंशन मिल रही थी। अचानक पेंशन की धनराशि बैंक में आनी बंद हो गई। समाज कल्याण कार्यालय गए तो बताया गया कि शरदचंद शुक्ला पूर्व प्रोफेसर रह चुके हैं इसलिए उन्हें अपात्र घोषित कर दिया गया है।
आशा देवी का दावा है कि उनके पास खेती योग्य भूमि तक नहीं है। दंपती का गुजारा पति को मिलने वाली पेंशन राशि से चलता है। शरदचंद का कहना है कि समाज कल्याण विभाग ने बिना जांच और सत्यापन किए ही उन्हें अपात्र घोषित कर दिया। विभाग का कोई भी कर्मचारी या अधिकारी जांच करने गांव तक नहीं आया।
उन्होंने खुद कभी प्रोफेसर नहीं होने और भूमिहीन होने के शपथपत्र के साथ मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को पत्र लिख कर न्याय की गुहार लगाई है। जिला समाज कल्याण अधिकारी वशिष्ठ नारायण सिंह ने मामले की जानकारी से इनकार करते हुए कहा कि शिकायत मिलने पर जांच कराई जाएगी, यदि पात्रता पाई गई तो पेंशन जारी होगी।