- एक थाना प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मियों को भी बना चुकी थी शिकार
- पुलिस को थी अंशिका की कई दिन से तलाश, फायरिंग के बाद पकड़ी गई
- युवती के चंगुल में फंसे पुलिसकर्मियों ने रुपये देकर बचाई थी अपनी गर्दन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सिंघड़िया चौराहे पर फायरिंग के मामले में गिरफ्तार की गई अंशिका के चौंकाने वाले कारनामे सामने आए हैं। महंगे शौक और रील की चकाचौंध ने उसे अपराध की राह पर पहुंचा दिया। वह शहर के एक थाने के प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मियों को अपने जाल में फंसा चुकी थी। स्थिति बिगड़ती देख कुछ पुलिसकर्मियों ने रुपये देकर अपनी गर्दन बचाई थी। युवती की गतिविधियों को लेकर पुलिस को लंबे समय से जानकारी मिल रही थी और उसकी तलाश भी कई दिन से की जा रही थी।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक शातिर अंशिका पहले सोशल मीडिया और व्यक्तिगत संपर्कों से लोगों से नजदीकियां बढ़ाती थी फिर झूठे आरोपों और दबाव की रणनीति अपनाकर उन्हें फंसाती थी। उसने कुछ पुलिसकर्मियों को भी निशाने पर लिया था। एक थाने के प्रभारी समेत आठ पुलिसकर्मी उसके चंगुल में फंस गए थे। मामला उजागर होने के डर से कुछ पुलिसकर्मियों ने उसे पैसे देकर मामला दबाने की कोशिश की।
बताया जा रहा है कि युवती के खिलाफ शिकायतें मिल रहीं थीं लेकिन ठोस साक्ष्य के अभाव में पुलिस कार्रवाई नहीं कर पा रही थी। मंगलवार की देर शाम फायरिंग के मामले में पुलिस ने उसे दबोच लिया। पुलिस को उसके पास से आपराधिक गतिविधियों से जुड़े अहम साक्ष्य भी मिले हैं। कई संवेदनशील जानकारियां सामने आईं हैं, जिन्हें पुलिस जांच का हिस्सा बना रही है। उसके चंगुल में फंसे कई पुलिसकर्मी भी लाइन हाजिर हुए थे।
हरकतें देख परिवार ने बना ली थी दूरीमूलरूप से हरपुर-बुदहट क्षेत्र की रहने वाली अंशिका घरवालों से अलग रहती थी और सोशल मीडिया पर बेहद सक्रिय थी। उसके महंगे रहन-सहन और दोस्तों के साथ घूमने-फिरने के शौक के कारण परिवार ने उससे दूरी बना ली थी। सोशल मीडिया पर उसके साढ़े सात हजार फॉलोअर हैं और अब तक उसने 700 से अधिक रील्स पोस्ट कीं हैं। महंगे कपड़े पहनना, नए मोबाइल रखना और दोस्तों के साथ समय बिताना उसका शौक था। उसने कई पुलिसकर्मियों के फोटो भी इंस्टग्राम पर भाई बताते हुए वायरल किए थे।
गाड़ी चोरी के मामले में थी वांछित
पुलिस के अनुसार, अंशिका और उसके छह साथियों के खिलाफ 12 अक्तूबर 2025 को थार जीप चोरी करने और उस पर फर्जी नंबर प्लेट लगाने के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। गाजीपुर के नोनहरा निवासी चंदन नारायण ने खोराबार पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि आरोपी दिल्ली से चोरी हुई थार गाड़ी पर फर्जी नंबर प्लेट लगाकर घूमते हैं। पुलिस ने इस मामले में 13 अक्तूबर को वनसप्ती तिराहे के पास बड़हलगंज के दोरम्हा निवासी प्रिय प्रवास दुबे उर्फ विक्की और देवरिया के बरहज बाजार निवासी आकाश वर्मा उर्फ बंटी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। अंशिका समेत चार अन्य आरोपियों की तलाश जारी थी। जांच में गाड़ी में चार फर्जी नंबर प्लेट मिलीं, जिनमें दो हरियाणा, एक बिहार और एक गोरखपुर की थी। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि सितंबर में दिल्ली से गाड़ी किराए पर ली और उसे लेकर भाग गए थे।
किराए की थार को लेकर भाग आए थे आरोपी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पिछले साल वे सितंबर माह में दिल्ली घूमने गए थे और वहीं से थार किराये पर ली थी, जिसे लेकर भाग आए थे। पकड़े जाने के डर से फर्जी नंबर प्लेट लगाकर शहर में फर्राटा भर रहे थे। दो साथियों की गिरफ्तारी के बाद अंशिका अंडरग्राउंड हो गई थी। अंशिका अपने साथियों के साथ मॉडल शॉप पर शराब खरीदने के लिए रुकी थी। इसी बीच उसका विवाद हो गया। जिसमें अमिताभ को गोली लग गई। उसके पास पिस्टल कहां से आई इसकी भी जांच की जा रही है।
कोट
युवती की गिरफ्तारी के बाद उसके पुराने संपर्कों और मामलों की गहन जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसने किन-किन लोगों को ब्लैकमेल किया और कितनी रकम वसूली। किन परिस्थितियों में पुलिसकर्मी उसके दबाव में आए इसकी भी जांच कराई जा रही। अंशिका समेत चार पर हत्या की कोशिश का केस दर्ज किया गया है।
- योगेंद्र सिंह, सीओ कैंट