खेत में मिली अष्टधातु की मूर्तियां।
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कुशीनगर जिले में तुर्कपट्टी के पास छहूं गांव में आठवीं शताब्दी की भगवान सूर्य की मूर्ति मिली थी। यह मूर्ति सैंड स्टोन की बनाई गई। किसान जब खेत में हल चला रहे थे तो यह मूर्ति मिली थी। मूर्ति बहुत ही जर्जर हालत में थी। 15 दिनों तक पुरातत्व विभाग की टीम ने इसकी सफाई की और गांव में ही मंदिर में स्थापित करा दिया गया, ताकि मालखाने में जाने पर यह और खराब हो जाती। इसी प्रकार गोरखपुर जिले के गोला में भगवान विष्णु की मूर्ति एक वर्ष पूर्व मिली थी। मूर्ति में भगवान विष्णु के चार हाथ बने थे। यह काले पत्थर से बनाई गई थी। यह मूर्ति भी छठीं शताब्दी के आसपास की है।
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इंटेक के संयोजक महावीर प्रसाद कंदोई के मुताबिक, वर्ष 2016 में बड़हलगंज में चोरी की अष्टधातु मूर्तियां बरामद हुई थीं। वह और सह संयोजक पीके लाहिड़ी थाने गए थे। वहां देखा कि मालखाने में देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी गई थीं। यही से हम लोगों ने भगवान की बेशकीमती मूर्तियाें के सरंक्षण की लड़ाई शुरू की। इस संदर्भ में तत्कालीन आईजी मोहित अग्रवाल से मिले। उन्हें उड़ीसा हाईकोर्ट की ओर से 1998 में प्राचीन मूर्तियों के संरक्षण के लिए दिए गए आदेश की कॉपी उपलब्ध कराई गई।
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इसमें कहा गया था कि बेशकीमती मूर्तियों के रखरखाव के लिए इन्हें म्यूजियम में रखा जाए। आईजी ने शासन तक पहल की। इसके बाद तत्कालीन कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने छह अक्तूबर 2019 को शासन को पत्र लिखा। जब शासन से कोई आदेश नहीं आया तो एक पीआईएल दाखिल की गई। उधर, 18 अगस्त 2021 कैंट थाने के मालखाने से देवी-देवताओं की करोड़ों रुपये की 26 प्राचीन मूर्तियां बौद्ध संग्रहालय में पहुंचाई गईं। इसके बाद 29 सितंबर 2021 को अपने दाखिल याचिका को वापस लेने के लिए अधिवक्ता से एक एफईडेविट कोर्ट में दाखिल करा दिया।
अष्टधातु की मूर्तियां।
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थाने के मालखाने से हटाकर प्राचीन दुर्लभ मूर्तियाें को संग्रहालय में रखने की शुरुआत पहली बार दो वर्ष पूर्व हुआ। अगस्त 2021 में कैंपियरगंज थाने से 300 वर्ष पुरानी दो मूर्तियां और कुछ मुकुट राजकीय बौद्ध संग्रहालय में पहुंचाया गया। इसके बाद कैंट थाने से भगवान श्रीराम, सीता, विष्णु भगवान सहित 26 अष्टधातु व काले पत्थर की मूर्तियां संग्रहालय में संरक्षित की गईं।
समन्वयक इंटेक महाबीर प्रसाद कंदोई ने कहा कि पांच साल के अथक प्रयास के बाद इंटेक गोरखपुर चैप्टर को सफलता मिली है। एडीजी अखिल कुमार के विशेष सहयोग से प्राचीन मूर्तियों को संरक्षित करने का प्रस्ताव इंटेक के चेयरमैन की ओर से संसदीय स्थायी समिति के सामने रखा गया। समिति ने इस कार्य की सराहना की है।
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आशा की जाती है कि समिति की सिफारिश के अनुसार उक्त प्रक्रिया पूरे देश में शीघ्र ही लागू हो जाएगी। इसके तहत देशभर के थानों के मालखानों में प्राचीन काल खंड की रखी गईं दुर्लभ मूर्तियां व विरासत सामग्री को सुरक्षित रखा जाएगा। शोधकर्ताओं और नई पीढि़यों को हमारी प्राचीन विरासत की जानकारी हो पाएगी।