स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने खाताधारकों के लिए खाते में नॉमिनी का नाम जुड़वाने का काम आसान कर दिया है। अब एसबीआई कस्टमर अपने इंटरनेट बैंकिंग के जरिए खाते में नॉमिनी का नाम जोड़ सकते हैं। ग्राहक चाहें तो यह काम ब्रांच में जाकर भी कराया जा सकता है।
दरअसल बैंक और बीमा संबंधी मामलों को लेकर रिजर्व बैंक नॉमिनी का नाम जोड़ने के लिए काफी संजीदा हो गया है। इसे ध्यान में रखते हुए देश के सबसे बड़े बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने खास सुविधा की शुरुआत की है। एसबीआई ने एक ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी है। ग्राहकों को बताया है कि खाताधारक बैंक की ऑफिशियल वेबसाइट पर विजिट कर नॉमिनी का नाम जोड़ सकते हैं। इसके लिए ब्रांच जाने की जरूरत नहीं होगी।
किसे बना सकते हैं नॉमिनी
यदि आप विवाहित हैं तो खाते में नॉमिनी के तौर पर आप पति या पत्नी का नाम दर्ज करा सकते हैं। आप चाहें तो अपने बच्चे, माता-पिता, परिवार के किसी सदस्य या फिर खास मित्र को भी नॉमिनी बना सकते हैं। प्रॉपर्टी या जमा राशि के मालिक की मृत्यु होने पर नॉमिनी को ही उसका फायदा मिलता है।
बीमा पॉलिसी लेते समय किसी नॉमिनी का नाम देना जरूरी होता है। आप चाहें तो एक से ज्यादा नॉमिनी का नाम भी दे सकते हैं। इसमें कोई नियम का अड़चन नहीं है। खाताधारक को यह सुविधा मिलती है कि वह नॉमिनी का नाम बदल सकता है।
क्यों जरूरी होता है नॉमिनी
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भी सलाह देता है कि आप अपने बैंक खाते में अपने किसी भी करीबी का नाम नॉमिनी के रूप में जुड़वाएं। आप नया खाता खोलते हैं तो उसके लिए नॉमिनी जोड़ना जरूरी होता है, लेकिन पुराने खाते में नॉमिनी का नाम जुड़वाना और भी जरूरी होता है। यह एक तरह से आपके परिवार के लिए सुरक्षा कवच जैसा होता है। दुर्भाग्यवश अगर कोई घटना हो जाए तो खाते में जमा राशि नॉमिनी को ही दी जाती है।
अगर नॉमिनी का नाम न हो तो जमा राशि पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसके लिए कानूनी कार्रवाई काफी लंबी होती है। अक्सर कुछ हजार रुपयों के लिए लोग इस झंझट में पड़ते ही नहीं हैं। इसलिए बैंक में सेविंग्स अकाउंट खोलने, म्यूचुअल फंड्स में निवेश करने या बीमा पॉलिसी लेते समय नॉमिनी का नाम जरूर जुड़वाएं।