भारतीय हॉकी खिलाड़ी, टोक्यो ओलंपिक 1964
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टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश के बाद से देश को फाइनल में जीत की आस जगी थी। मगर भारतीय टीम ने कांस्य पदक हासिल कर 41 वर्ष लंबे पदकों के सूखे को खत्म किया है। आज हम आपकी मुलाकात गोरखपुर के ऐसे हीरो से कराने से जा रहे हैं। जो 57 वर्ष पहले ही टोक्यो की सरजमीं पर आयोजित ओलंपिक खेल के फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान को पराजित कर देश की झोली में स्वर्ण पदक डालने वाली टीम का हिस्सा थे।
हॉकी के स्वर्णिम दौर में गोरखपुर की चमक बिखेरने वाले खिलाड़ी का नाम ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अली सईद है। उम्र के इस पड़ाव पर उन दिनों का याद करते हुए अली सईद ने बताया कि भारतीय हॉकी टीम पर उस समय जबरदस्त दबाव था। ओलंपिक में एकमात्र हॉकी ही ऐसा खेल था जिससे देश को पदक की उम्मीद थी। फाइनल में मुकाबला भी चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान टीम से था।
दोनों टीमों ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए एक दूसरे के गोल पर कई प्रहार किए मगर जल्द किसी को सफलता नहीं मिल रही थी। जीत के प्रति जज्बात ऐसे थे कि कई बार अंपायरों को दखल देना पड़ता था। आखिरकार मोहिंदर लाल ने शानदार गोल कर भारत की झोली में 1-0 से मैच को डाल दिया। विजेता टीम का धूमधाम से स्वागत हुआ। गोरखपुर के लाल का डंका पूरे देश में बज उठा था।