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खेल दिवस पर विशेष: 57 साल पहले टोक्यो ओलंपिक में गोरखपुर के ओलंपियन ने लहराया था तिरंगा, पूरे देश में बजा था डंका

Sun, 29 Aug 2021 01:45 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

1964 में ओलंपिक के फाइनल में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को दी थी शिकस्त। गोरखपुर के अली सईद हैं ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट।
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भारतीय हॉकी खिलाड़ी, टोक्यो ओलंपिक 1964 - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम के क्वार्टर फाइनल में प्रवेश के बाद से देश को फाइनल में जीत की आस जगी थी। मगर भारतीय टीम ने कांस्य पदक हासिल कर 41 वर्ष लंबे पदकों के सूखे को खत्म किया है। आज हम आपकी मुलाकात गोरखपुर के ऐसे हीरो से कराने से जा रहे हैं। जो 57 वर्ष पहले ही टोक्यो की सरजमीं पर आयोजित ओलंपिक खेल के फाइनल मुकाबले में पाकिस्तान को पराजित कर देश की झोली में स्वर्ण पदक डालने वाली टीम का हिस्सा थे।
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हॉकी के स्वर्णिम दौर में गोरखपुर की चमक बिखेरने वाले खिलाड़ी का नाम ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अली सईद है। उम्र के इस पड़ाव पर उन दिनों का याद करते हुए अली सईद ने बताया कि भारतीय हॉकी टीम पर उस समय जबरदस्त दबाव था। ओलंपिक में एकमात्र हॉकी ही ऐसा खेल था जिससे देश को पदक की उम्मीद थी। फाइनल में मुकाबला भी चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान टीम से था।

दोनों टीमों ने आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए एक दूसरे के गोल पर कई प्रहार किए मगर जल्द किसी को सफलता नहीं मिल रही थी। जीत के प्रति जज्बात ऐसे थे कि कई बार अंपायरों को दखल देना पड़ता था। आखिरकार मोहिंदर लाल ने शानदार गोल कर भारत की झोली में 1-0 से मैच को डाल दिया। विजेता टीम का धूमधाम से स्वागत हुआ। गोरखपुर के लाल का डंका पूरे देश में बज उठा था।
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टीम के एकजुट प्रदर्शन ने सेमीफाइनल में दिलाई जगह

वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी अली सईद - फोटो : अमर उजाला।
अली सईद ने बताया कि स्पेन और जर्मनी के खिलाफ मैच के पहले बारिश होने की वजह से खेलना मुश्किल हो गया था। स्पेन और जर्मनी के खिलाफ मैच गोलरहित ड्रा पर समाप्त हुआ। इससे भारतीय टीम का अगले दौर में प्रवेश करना मुश्किल नजर आ रहा था। लेकिन सभी के एकजुट प्रदर्शन ने टीम को सेमीफाइनल में जगह दिलाई।

टीम चयन में होती थी कड़ी प्रतिस्पर्धा
ओलंपियन ने बताया कि उस दौर में टीम चयन के लिए काफी कड़ी प्रतिस्पर्धा होती थी। कैंप में पहले 80 खिलाड़ियों का चयन किया जाता था। उनमें से 40 खिलाड़ियों को अलग किया गया। आखिर में 18 खिलाड़ी चुने गए थे।
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