एलईडी के विभिन्न उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण पाकर इनमें से 150 लोगों ने खुद ही अपना काम करना शुरू कर दिया। इन लोगों ने अपनी दुकान खोल ली और फिर रॉ मैटेरियल लाकर विभिन्न उत्पाद तैयार करते हैं और उन्हें अपनी दुकान पर बेचते हैं। 50 लोगों ने तो खुद अपने नाम से उत्पाद बनाना शुरू कर दिया है।
वीएस एनर्जी के एमडी विवेक सिंह ने बताया कि पांच दिन के प्रशिक्षण में एलईडी के विभिन्न उत्पाद बनाने में दक्षता हासिल हो जाती है। अनलॉक-1 शुरू होने के बाद गोरखपुर में एलईडी बनाने का प्रशिक्षण शिविर शुरू किया था। अब तक 360 लोगों को प्रशिक्षित कर चुका हूं। इनमें से कई ने तो अपनी दुकान खोल ली और घर में उत्पाद तैयार कर बिक्री भी करते हैं। कई प्रशिक्षित रॉ मैटेरियल लेकर उत्पाद तैयार करते हैं, फिर मुझे वापस कर देते हैं। इन लोगों की औसतन रोजाना 400 से 500 रुपये की कमाई हो जाती है।
देवरिया के गढ़रामपुर गांव के जितेंद्र सिंह ने बताया कि एलईडी के उत्पाद बनाने के प्रशिक्षण के संबंध में अमर उजाला से जानकारी मिली थी। प्रशिक्षण के बाद पहले अपनी दुकान खोल ली। रॉ मैटेरियल लाकर घर पर ही विभिन्न उत्पाद तैयार कर लेते हैं। कोरोना संकट के दौरान यह प्रशिक्षण बहुत ही फायदेमंद साबित हुआ है।
बस्ती के फलाने गांव के बाल गोविंद सिंह ने बताया कि हम चार दोस्त हैं, जो बीएड के साथ टीईटी क्वालीफाइड हैं। लॉकडाउन से पहले बच्चों को ट्यूूशन पढ़ाते थे। लॉकडाउन में सब बंद हो गया और आमदनी का स्रोत पूरी तरह से बंद था। ऐसे में एलईडी उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया। अब रॉ मैटेरियल लाकर माल तैयार करते हैं और बाजार में बेच देते हैं। जीवन यापन लायक कमाई हो जाती है।