विकास भारती स्कूल में विद्यार्थियों को किसी गलती की अनोखी 'सजा' दी जाती है। सजा ऐसी जिससे बच्चों में रचनात्मकता का विकास होता है। उनका शब्दों के बारे में ज्ञान बढ़ता है। किसी विषय में उनकी समझ बढ़ती है। साथ ही उन्हें अपनी गलती का एहसास भी होता है। स्कूल प्रशासन का इस बारे में स्पष्ट कहना है कि गलती के लिए सजा देने से बेहतर है किसी को उसकी गलती का एहसास दिलाना।
आए दिन स्कूल में गलती करने पर शिक्षकों द्वारा शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना की बात सामने आती रहती है। लेकिन शिक्षक को शायद ही इस बात का भान होता है कि इससे बच्चों के मन में कुंठा बैठ जाती है। जरूरी यह होता है कि बच्चे को उसकी गलती को एहसास हो।
इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए विकास भारती स्कूल ने छात्र को गलती करने पर डांट डपट भी नहीं की जाती है। कोई छात्र किसी तरह की गलती करता है तो सजा के तौर पर उसे किसी ऐसे शब्द को पांच सौ बार लिखने को दिया जाता है जो बहुत ही असामान्य हो। इससे न सिर्फ बच्चों का शब्दकोष बढ़ता है बल्कि हैंडराइटिंग भी अच्छी होती है। इसके अलावा बच्चों को किसी खास टॉपिक पर 500 शब्दों में लिखने को दिया जाता है।