गोरखपुर शहर के सूरजकुंड धाम की महिमा बेहद खास है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान राम एक बार राज्य भ्रमण के लिए निकले थे। थककर उन्होंने यहीं विश्राम किया था। अगले दिन सुबह उठकर उन्होंने इसी सरोवर में स्नान किया था।
बाहर निकल एक पिंड बनाकर सूर्यदेव काआह्वान किया था। सूर्यदेव ने जब दर्शन दिए तो भगवान श्रीराम ने उन्हें दीपदान किया था।
ज्योतिषाचार्य घनश्याम पांडेय ने बताया कि धार्मिक ग्रंथों के अलावा सूरजकुंड का उल्लेख वाल्मिक के रामायण में भी है। भगवान श्रीराम ने दीपदान किया था इसीलिए सरोवर का नाम सूरजकुंड पड़ा था।
दीवाली के दिन दीपोत्सव की परंपरा आज भी बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। सूरजकुंड में दीपोत्सव का अपना-अलग महत्व है। गोरखपुर के अलावा आसपास से बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होकर दीप जलाते हैं।
मान्यता है कि भगवान सूर्य अपने भक्तों की सभी कामना पूरा करते हैं। यहां मान्यता है कि सूरजकुंड में सात कुंड हैं। इनका पानी कभी नहीं सूखता है।