मामला शांत हो गया था। इसके बाद 21 दिसंबर 2018 को नेपाल पुलिस ने एक शव का फोटो उत्तर प्रदेश सरकार को इस आशय से भेजा कि शव भारत का हो सकता है। डीजीपी कार्यालय में फोटो गई फिर क्या चंद सेकेंड में ही मामला खुलने लगा।
डीजीपी कार्यालय में तैनात एक सिपाही ने फोटो की पहचान राखी के रूप में कर दी। क्योंकि सिपाही आरोपित डॉक्टर का गनर रह चुका था और फिर उसके बताने पर एसटीएफ को जिम्मा सौंपा गया।
एसटीएफ टीम ने जांच की और फिर डॉक्टर को उसके दोस्तों के साथ हिरासत में ले लिया गया। पता चला कि नेपाल में ही राखी को शराब में जहर दिया गया था और फिर पहाड़ से नीचे फेंक दिया गया था।