जमींदार की बात सुनकर गांव वाले बहुत खुश हुए। सभी लोग जंगल की तरफ प्रस्थान कर स्वप्न में भगवान शंकर द्वारा बताए गए स्थान पर पहुंचे। वहां पहुंचने पर ग्रामीण हैरान रह गए, उन्होंने देखा कि झाड़ियों में एक शिवलिंग पड़ा हुआ है।
ग्रामीणों ने जमीन से खोदकर शिवलिंग को बाहर निकाला और उसे बैलगाड़ी पर लादकर गांव की तरफ बढ़ने लगे। जंगल से ज्यों आगे बढ़े तो बैलगाड़ी टूट गई, उसके बाद दूसरी बैलगाड़ी पर शिवलिंग को रखा, इसी प्रकार एक-एक कर सात बैलगाड़ी टूट गई। उसके बाद उसी स्थान पर शिवलिंग जमीन मे धंसने लगा और रात हो गई।
रात होने से सभी लोग अपने घर चल गए। दूसरे दिन सुबह हुआ तो लोग इकट्ठा होकर शिवलिंग निकालने लगे तो उसी शिवलिंग के पास जमीन के अंदर से मधुमक्खी, हड्डा और बिच्छू निकलने लगे। ऐसे में सभी लोग डर कर भाग गए।
दूसरे दिन रात में नथुनी सिंह ने स्वप्न देखा कि भगवान शंकर आए और बोले कि हम जहां हैं वहीं रहने दो। मंदिर के पुजारी सत्य नारायण दास ने बताया कि जो भी सच्चे मन से भोलेनाथ के दरबार मे आकर मन्नत मांगता है उसकी हर मुराद पूरी होती है।