गोरखपुर में खाद कारखाना स्थापित करने का काम तेजी से चल रहा है। हाल ही में यहां टरबाइन लाने में कई महीने लग गए। जिस ट्राला पर उसे लाया गया था, उसमें 140 पहिए लगे थे।
वहीं बहुत कम लोग जानते हैं कि जब 1965 में गोरखपुर खाद कारखाना स्थापित किया गया था तो उस समय अमोनिया सिंथेसिस ट्यूब (पाइप) लाने में रेलवे को स्पेशल वैगन बनाना पड़ा था।
उस समय एक ट्यूब का वजन 35 टन था और इसमें 5000 पौंड प्रति स्कावयर इंच प्रेशर था। इस वैगन को गोरखपुर रेल कारखाना में तैयार किया गया। इसे जापान से कोलकाता बंदरगाह पर लाया गया और रेलवे ने वहां से गोरखपुर लाने का प्रबंध किया।
दरअसल, उस समय फोरलेन नहीं थी। ऐसे में इतना बड़ा ट्राला लाना मुमकिन नहीं था। रेलवे इसे सामान ढुलाई में बड़ी उपलब्धि मानता है और अपने दस्तवेजों में इसे संरक्षित किया है।