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एक्सक्लूसिव: कच्ची उम्र का प्यार घरवालों के लिए बन रहा सिरदर्द, बेबस होकर बोले- 'इसे हवालात में ही रखो दरोगा जी'

Tue, 09 Feb 2021 11:52 AM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
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कच्ची उम्र का प्रेम घरवालों के लिए जिल्लत तो पुलिस के लिए नई मुसीबत साबित हो रहा है। गोरखपुर जिले में एक हफ्ते में पुलिस तक ऐसे नौ मामले पहुंचे हैं, जिनमें किशोरवय लड़के-लड़की का लगाव दो घरों में अलगाव की वजह बन गया। तीन मामलों में लड़की को फुसला कर भगाने का केस भी दर्ज है। वहीं, साइबर थाने में सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल की शिकायत भी पहुंची।

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पुलिस की पूछताछ में बेटी की रजामंदी का कड़वा सच सामने आया तो खुद को बेबस मानकर कुछ अभिभावक तो कह बैठे कि इसे कुछ दिन हवालात में ही रखो दरोगा जी। लेकिन पुलिस किशोर और अभिभावक को समझाकर सुलह की कोशिश कर रही है। जब बात नहीं बनती है तो कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। इस तरह नाबालिग अवस्था में कानूनी दांव पेच में फंस रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक कहीं अशिक्षा तो कहीं खुद को आधुनिक साबित करने की होड़ ऐसी घटनाओं को बढ़ा रही है। मनोवैज्ञानिक इसे पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण का प्रभाव बताते हैं। दोनों का मानना है कि फिल्म और टीवी सीरियल के बाद सोशल मीडिया के विविध आयाम की पहुंच हर घर तक है। जीवकोपार्जन की उलझन में घर के बड़े बच्चों को समय नहीं दे पाते, जबकि इससे पैदा हुए खालीपन में वे माध्यम जगह बना लेते हैं, जिनमें प्यार और आधुनिकता का फलसफा कुछ अलग तरह से परिभाषित किया जाता है।

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जेल भी पहुंचा रही नादानी

चौराहे या किसी अन्य जगह पर पकड़े जाने के बाद अक्सर लड़की पक्ष की ओर से तहरीर में छेड़खानी या बरगला कर ले जाने जैसे आरोप लगाए जाते हैं। ऐसे मामलों में युवक हो या किशोर उन्हें जेल जाना पड़ता है। फुसला कर भगाने के ज्यादातर मामलों की जांच में दोनों की रजामंदी सामने आती है। लड़की के नाबालिग होने पर पुलिस उसे घर या महिला आश्रय केंद्र भेजती है, जबकि बालिग की शादी को हरी झंडी दे देती है। कुछ समय पहले ऐसे एक मामले में सरहरी चौकी में शादी कराई थी।

केस 1
सहजनवां थाने से चंद कदम की दूरी पर एक जनवरी की रात एक लड़का और लड़की के संदिग्ध स्थिति में मौजूद होने की सूचना पर पुलिस सक्रिय हुई। दोनों को थाने लाई। लड़की किशोरवय थी, लिहाजा उसे महिला थाने भेजा। तलाश में भटकते घर वाले थाने पहुंचे तो बेटी के इरादे जानकर झटका लगा। टूटकर बेटी को कुछ दिन थाने में ही रखने की सिफारिश करने लगे। पुलिस ने दोनों को समझा कर किशोरी की घर वापसी का रास्ता तैयार कराया।

केस 2
सिकरीगंज थाने में पंद्रह दिन पहले पुलिस ने छेड़खानी का एक केस दर्ज किया। जांच में पता चला कि जिसके खिलाफ केस दर्ज कराया गया, उसका लड़की से प्रेम संबंध था। सच जानने के बाद लड़की के घर वालों ने न सिर्फ दोनों को पकड़ लिया बल्कि लड़के की जमकर पिटाई करने के बाद तहरीर देकर छेड़छाड़ का केस दर्ज करा दिया।
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केस 3

चार फरवरी को पीपीगंज इलाके का एक मामला साइबर थाने में आया। 9वीं की छात्रा ने शिकायत की कि उसके नाम की आईडी बनाकर उसे धमकी दी जा रही है। जांच की गई तो पता चला कि उसके दोस्त की पहले प्रेमिका रही छात्रा ही उसे धमकी दी थी। जांच में सच सामने आने के बाद सभी के अभिभावक को बुलाकर समझा बुझाकर पुलिस ने घर भेजा।
 
मनोवैज्ञानिक प्रो. सुषमा पांडेय ने बताया कि परिवार बच्चों की पहली पाठशाला होता है। लालन-पालन में पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ गया है। कई अभिभावक ओपेन सोसायटी की बात बेहिचक करते हैं। कम उम्र की संतानें इनके सही मायने समझे बिना ऐसी सोसायटी का हिस्सा बनने की कोशिश करती हैं। फिल्में, टीवी सीरियल भी प्यार को अलग तरह से परिभाषित करते हैं। युगल के साथ को आज की जरूरत की तरह पेश करते हैं। बेटा हो या बेटी, इन चीजों का प्रभाव उनके रहन-सहन, सोचने के ढंग पर पड़ता है। भटकाव की नौबत तक भी ले जाता है।
 
समाजशास्त्री प्रो. मानवेंद्र सिंह ने बताया कि अशिक्षा और अनुशासन की कमी से ऐसे मामले ज्यादा सामने आते हैं। किशोरावस्था में बच्चों को सही-गलत की ज्यादा समझ नहीं होती है। ऐसे में पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों की होती है कि वे उन पर नजर रखें। उनकी हर गतिविधि का मूल्यांकन करें। बच्चों के व्यवहार में बदलाव आने पर अभिभावक को काउंसलिंग करनी चाहिए। मित्रवत व्यवहार रखते हुए उन्हें सही और गलत की पहचान करानी चाहिए। सुविधाएं देने में खराबी नहीं है लेकिन ध्यान रखें कि उनका दुरुपयोग न हो।
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