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Gorakhpur News: भारतीय दृष्टि से इतिहास का पुनर्लेखन जरूरी

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- गोरखपुर विश्वविद्यालय में ''भारतीय इतिहास लेखन'' पर विशेष व्याख्यान का आयोजन
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय का प्राचीन इतिहास, पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग में ''भारतीय इतिहास लेखन में नवीन प्रवृत्तियां एवं चुनौतियां'' विषय पर एक दिवसीय विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य वक्ता अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. बालमुकुंद पांडेय ने कहा कि वर्तमान में इतिहास पुनर्लेखन आवश्यक है।
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उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में इतिहास को औपनिवेशिक चश्मे से हटाकर प्रामाणिक स्रोतों और शुद्ध भारतीय दृष्टिकोण से लिखे जाने की आवश्यकता है। अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. राजवंत राव ने कहा कि इतिहास केवल अतीत की गाथा नहीं है बल्कि यह भविष्य का मार्गदर्शक है। प्राचीन इतिहास,पुरातत्त्व एवं संस्कृति विभाग की अध्यक्ष प्रो. प्रज्ञा चतुर्वेदी ने अतिथि सत्कार के उपरांत अपने विचार साझा किया। विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सत्येन्द्र मिश्रा ने अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया। संचालन एवं संयोजन में डॉ. विनोद कुमार की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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