-प्रोटीन और विटामिन-ए युक्त गर्म व पौष्टिक आहार बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी
-एम्स गोरखपुर के बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। सर्दी का मौसम बच्चों, विशेषकर नवजात शिशुओं के लिए स्वास्थ्य की दृष्टि से अधिक जोखिमपूर्ण होता है। एम्स गोरखपुर के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. महिमा मित्तल के अनुसार, कम तापमान के कारण बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है, जिससे वे संक्रमण और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।
ठंड में बच्चों में सर्दी, खांसी, बुखार, दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं आम हैं। कुछ मामलों में स्थिति गंभीर होकर निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारी का रूप भी ले सकती है। नवजात शिशुओं के लिए यह समय और भी नाजुक होता है, क्योंकि जन्म के बाद पहले 28 दिन उनके जीवन के सबसे संवेदनशील दिन होते हैं। इस दौरान शिशु के शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता विकसित नहीं होती। इसलिए थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर असर डाल सकती है। नवजात शिशुओं को विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है।
डॉ. मित्तल ने बताया कि नवजात शिशु अपने शरीर की गर्मी स्वयं बनाए रखने में सक्षम नहीं होते। इसलिए सर्दी में उन्हें पर्याप्त गर्माहट देना और लगातार निगरानी रखना अत्यंत आवश्यक है। सही देखभाल से ठंड से जुड़ी जटिलताओं को आसानी से रोका जा सकता है। बच्चों को प्रोटीन और विटामिन-ए युक्त गर्म व पौष्टिक आहार उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। विटामिन-सी से भरपूर फल जैसे संतरा, नींबू और पपीता इम्यूनिटी को मजबूत करते हैं। घर का ताजा भोजन सब्जी का सूप, दाल, उबले अंडे, खिचड़ी, घी, गर्म दूध, सूखे मेवों का पाउडर, गुड़, हल्दी और मौसमी फल बच्चों के लिए विशेष रूप से लाभकारी हैं।
सर्दियों में बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपाय
- परतों में कपड़े पहनाएं।
- पौष्टिक और गर्म भोजन दें।
- पर्याप्त तरल पदार्थ दें।
- पूरी नींद सुनिश्चित करें।
- समय पर टीकाकरण कराएं।
- शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
- सुबह और शाम अनावश्यक बाहर जाने से बचाएं।
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कोट
सर्दियों में नवजात शिशुओं और बच्चों की देखभाल में अतिरिक्त सावधानी अत्यंत आवश्यक है। यदि माता-पिता गर्म कपड़े, पौष्टिक भोजन, स्वच्छता और समय पर चिकित्सा सलाह इन चार बातों पर ध्यान दें, तो बच्चे सर्दियों के मौसम में भी पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ रह सकते हैं।
-डॉ. महिमा मित्तल, विभागाध्यक्ष, बाल रोग विभाग