शिकायती पत्र में शेषनाथ जायसवाल ने बताया कि नौ अप्रैल को उन्होंने अपने फेसबुक पर एक देवता की चालीसा का वीडियो डाला। उनके मित्र लिस्ट के हसन मॉडल ने अपशब्द पोस्ट कर दिया जिसकी तहरीर थाने पर दी गई थी। कोई कार्रवाई न होने पर शिकायत उच्चाधिकारियों से की। जिसके बाद जांच साइबर सेल व क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।
उस समय चूंकि साइबर थाना नहीं था, इसलिए साइबर टीम ने जांच कर मामले को सही पाते हुए 21 मई को आख्या प्रस्तुत की, फिर एसपी क्राइम अशोक वर्मा ने 22 मई को खोराबार पुलिस को अविलंब कार्रवाई का निर्देश दिया।
पुलिस ने आदेश को न मानते हुए दो जून को भारतीय दंड विधान की धारा 504 (असंज्ञेय अपराध) के तहत मामला दर्ज किया। खोराबार के तत्कालीन थानेदार वर्तमान में एसएसपी ऑफिस में तैनात हैं। उनसे बात करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जब भी उनका पक्ष प्राप्त होगा, प्रकाशित किया जाएगा।
सिविल कोर्ट अधिवक्ता अमित सिंह ने बताया कि आईटी एक्ट के मामले में पुलिस का एनसीआर दर्ज करना समझ से परे है। ऐसा होना नहीं चाहिए।
रिटायर्ड सीओ श्यामरथी आर्य ने बताया कि मामले में आईटी एक्ट तो दर्ज होना ही चाहिए। साथ में धारा 504 भी होना चाहिए। पुलिस की यह लापरवाही है।
रिटायर्ड एसपीओ रामलखन ने बताया कि जांच आख्या में देवता पर टिप्पणी होना स्पष्ट नहीं है। लेकिन, फेसबुक पर अपशब्द कहा गया है। जिससे आईटी एक्ट की धारा बनती है। साथ में 504 भी। यह पुलिस की लापरवाही है।
एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि अगर ऐसा हुआ है तो पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।