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गोरखपुर: पुलिस ने आईटी एक्ट के अपराध में दर्ज की एनसीआर, आरटीआई के तहत मांगी सूचना तो खुला राज

Fri, 04 Sep 2020 01:04 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

  • आरटीआई के तहत मांगी सूचना के बाद खोराबार पुलिस की कार्रवाई सामने आई
  • फेसबुक पर अपशब्द कहने के मामले में एसपी क्राइम ने दिया था कार्रवाई का निर्देश
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के खोराबार पुलिस ने आईटी एक्ट के अपराध को असंज्ञेय अपराध की धारा 504 (गाली-गलौच) के तहत दर्ज कर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली, जबकि मामले में साइबर सेल व क्राइम ब्रांच ने जांच कर आईटी एक्ट के तहत मामला सही होने की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। एसपी क्राइम अशोक वर्मा ने पुलिस को अविलंब कार्रवाई का निर्देश दिया था, लेकिन तत्कालीन थानेदार सुनील राय ने आदेश को नहीं माना।

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इसकी जानकारी कुसम्ही के शेषनाथ जायसवाल को तब हुई जब उन्हें सूचना के अधिकार के तहत साइबर सेल व गोरखपुर पुलिस ने पूरी जानकारी हासिल की। इसके बाद सोमवार को उन्होंने राष्ट्रपति, पीएम, गृहमंत्री, सीएम, प्रमुख सचिव, डीजीपी, एडीजी सहित तमाम लोगों को मेल के जरिए पत्र भेज शिकायत की।

साथ ही मंगलवार को एसएसपी कार्यालय में सुनवाई कर रहे एसपी ट्रैफिक आशुतोष शुक्ला से मुलाकात कर गुहार लगाई और मांग की कि फेसबुक पर अपशब्द लिखने के आरोपी हसन मॉडल व लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की जाए।

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शिकायती पत्र में शेषनाथ जायसवाल ने बताया कि नौ अप्रैल को उन्होंने अपने फेसबुक पर एक देवता की चालीसा का वीडियो डाला। उनके मित्र लिस्ट के हसन मॉडल ने अपशब्द पोस्ट कर दिया जिसकी तहरीर थाने पर दी गई थी। कोई कार्रवाई न होने पर शिकायत उच्चाधिकारियों से की। जिसके बाद जांच साइबर सेल व क्राइम ब्रांच को सौंपी गई।

उस समय चूंकि साइबर थाना नहीं था, इसलिए साइबर टीम ने जांच कर मामले को सही पाते हुए 21 मई को आख्या प्रस्तुत की, फिर एसपी क्राइम अशोक वर्मा ने 22 मई को खोराबार पुलिस को अविलंब कार्रवाई का निर्देश दिया।  

पुलिस ने आदेश को न मानते हुए दो जून को भारतीय दंड विधान की धारा 504 (असंज्ञेय अपराध) के तहत मामला दर्ज किया। खोराबार के तत्कालीन थानेदार वर्तमान में एसएसपी ऑफिस में तैनात हैं। उनसे बात करने की कोशिश की गई, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। जब भी उनका पक्ष प्राप्त होगा, प्रकाशित किया जाएगा।
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सिविल कोर्ट अधिवक्ता अमित सिंह ने बताया कि आईटी एक्ट के मामले में पुलिस का एनसीआर दर्ज करना समझ से परे है। ऐसा होना नहीं चाहिए।

रिटायर्ड सीओ श्यामरथी आर्य ने बताया कि मामले में आईटी एक्ट तो दर्ज होना ही चाहिए। साथ में धारा 504 भी होना चाहिए। पुलिस की यह लापरवाही है।

रिटायर्ड एसपीओ रामलखन ने बताया कि जांच आख्या में देवता पर टिप्पणी होना स्पष्ट नहीं है। लेकिन, फेसबुक पर अपशब्द कहा गया है। जिससे आईटी एक्ट की धारा बनती है। साथ में 504 भी। यह पुलिस की लापरवाही है।

एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि अगर ऐसा हुआ है तो पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
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