12 मार्च 2023 : तिवारीपुर के आवास विकास काॅलोनी में 30 हजार रुपये के लिए मधुर मुरली गुप्ता की हत्या उनके बड़े पुत्र प्रिंस ने कर दी। आरी से गर्दन काटकर अलग करने के बाद ट्राॅली बैग में रखकर फेंक दिया। छोटे भाई की सूचना पर पुलिस ने आरोपी को पकड़ लिया।
25 फरवरी 2023 : सहजनवां के सहबाजगंज मोहल्ले में चाट विक्रेता अवधेश गुप्ता व उनके दोनों पुत्र आर्यन और आरव की गला रेतकर हत्या कर दी गई। संपत्ति की लालच में दूसरी पत्नी नीलम ने घटना को अंजाम दिया। सास की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने नीलम को जेल भेजा।
4 फरवरी 2023 : बड़हलगंज थानाक्षेत्र स्थित खड़ेसरी गांव के सिवान में बारीडीहा में रहने वाले राजगीर गिरजेश उर्फ गोलू का शव मिला था। भाई उग्रसेन की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और 8 फरवरी को पुलिस ने इसका राजफाश करते हुए गिरजेश की पत्नी उसके प्रेमी सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
25 जनवरी, 2023 : राजघाट के खुर्रमपुर मोहल्ले में रहने वाले शरदचंद्र पाल ने अवैध संबंध के संदेह में अपनी पत्नी नीलम की गला दबाकर हत्या कर दी। घटना के बाद थाने पहुंचकर शरद ने पत्नी की हत्या करने की सूचना पुलिसकर्मियों को दी। स्कूल बस चलाकर परिवार की जीविका चलाने वाले शरद को पत्नी के चरित्र पर संदेह था।
17 फरवरी 2022 : गुलरिहा के सराय गुलरिहा गांव में बरामदे में सो रहे शिक्षक इरशाद पर बहन ने अपने प्रेमी सूरज यादव जानलेवा हमला करा दिया। डेढ़ माह तक कोमा रहे इरशाद की उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। सर्विलांस के जरिए घटना का पर्दाफाश कर पुलिस ने इरशाद की बहन व उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
16 फरवरी 2022 : पिपराइच के चकिया गांव निवासी नारदमुनि का शव गांव के बाहर नहर के पास दफनाया मिला। छानबीन में पता चला कि पत्नी ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर हत्या करने के बाद शव को दफन करा दिया। सर्विलांस की मदद से घटना का पर्दाफाश कर पुलिस ने आरोपितों को जेल भेजा।
16 जनवरी 2022 : झंगहा के पलिपा गांव में प्रेम-संबंध में बदमाश ने दो साथियों की हत्या कर शव खेत में दफना दिया। घटना के बाद गांव में सनसनी फैल गई। सर्विलांस की मदद से पुलिस ने घटना का पर्दाफाश कर आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेजा।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्री दीपेंद्र मोहन सिंह ने कहा कि परिवार एक नियामक संस्था है जिसका अपने सदस्यों पर नियंत्रण रहा है, लेकिन वर्तमान संक्रमण के दौर में सामाजिक संस्थाएं अप्रभावी होती जा रही हैं। आर्थिक प्रक्रियाओं और असुरक्षा के कारण परिवार जैसी नैसर्गिक संस्थाओं में व्यापक परिवर्तन आया है। उपभोक्तावादी संस्कृति, पारंपरिक नैतिक मूल्यों के क्षरण तथा बढ़ती हुई व्यक्तिवादिता ने भावनात्मक बंधनों को कमजोर किया है। समकालीन परिवार संविदात्मक परिवार जैसे हो गए हैं, जिस कारण इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं।