गोरखपुर के गोला ब्लॉक के कुछ गांवों में इन दिनों युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक के व्हाट्सएप में चार से पांच मिनट का भोजपुरी गाने का आडियो पहुंच रहा है- सभई के दिलवा में जागल बाटल आस बा...। इसी तरह के कुछ और भी गाने हैं जो किसी फिल्म या एलबम के नहीं हैं, बल्कि प्रधान पद के दावेदारों ने अपने प्रचार के लिए तैयार कराए हैं।
सोशल मीडिया के जरिए ऐसे प्रचार वाले गाने, संदेश और वादे, वोटरों तक खूब पहुंचाए जा रहे हैं। व्हाट्सएप पर सुबह गुड मार्निंग के संदेश गिर रहे, तो रात को शुभ रात्रि या गुड नाइट (जो वोटर जितना पढ़ा लिखा उसके अनुसार) से अभिवादन हो रहा।
शहर के साथ-साथ अब गांवों तक भी हर हाथ में स्मार्ट फोन पहुंचने से पंचायतों के चुनाव प्रचार-प्रसार का भी तरीका बदल गया है। पिछले चुनावों तक जहां बैनर-पोस्टर और पंपलेट प्रचार का जरिया हुआ करते थे, वहीं अब सोशल मीडिया प्रचार का माध्यम बन गया है। विधानसभा, लोकसभा और नगर निगम के चुनाव में तो इनका इस्तेमाल पहले से हो रहा है।