अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले पंद्रह दिन से सोने की औसतन कीमत 51 लाख रुपये प्रति किलो चल रही है। इस सोने पर 12.5 फीसदी कस्टम ड्यूटी व 2.5 प्रतिशत सेस लगता है। सराफा मंडियों में एसबीआई और यस बैंक से सोना आता है। बैंकों से खरीदने पर कस्टम ड्यूटी व सेस चुकाने पर प्रति किग्रा सोना की कीमत करीब 9.00 लाख रुपये बढ़ जाती है।
इस एक किग्रा सोना को एक नंबर में बेचा जाए तो 3 फीसदी जीएसटी के हिसाब से 1.80 लाख रुपये ग्राहक से वसूलना होगा। तस्करी से खरीदा गया सोना कैश में बेचा जाता है। जीएसटी को भी जोड़ दिया जाए तो सीधे-सीधे 18 फीसदी धंधेबाजों की जेबों में चला जाता है। यही वजह है कि यह धंधा बढ़ रहा है। तस्करी के सोने को खपाने का एक सिंडीकेट है। इस सिंडीकेट में सोने को बेचने, खरीदने एवं मध्यस्थता करने वाले शामिल होते हैं। नेपाल, कोलकाता आदि से आने वाले तस्करी के सोने पर कस्टम ड्यूटी व सेस का जो पैसा बच जाता है वह बेचने, खरीदने एवं मध्यस्थता करने वालों में बंट दिया जाता।
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सूत्रों के मुताबिक, तस्करी का सोना नेपाल, कोलकाता, जयपुर व दिल्ली के रास्ते आगरा, कानपुर, लखनऊ और गोरखपुर पहुंच रहा है। इसमें भी सबसे ज्यादा आवक नेपाल एवं कोलकाता के रास्ते से होती है।
ऐसे बनाते हैं सोने को खरा
बिस्किट की शक्ल में आने वाले तस्करी के सोने पर बैंक का नाम और फर्जी नंबर दर्ज कर देते हैं। ग्राहक को झांसा देने के लिए यह सब किया जाता है। यह काम रिफाइनरी में होता है। हिंदी बाजार की रिफायनरी में भी ये खेल बड़े जोरों पर होता है। केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम जल्दी ही बाजार में कार्रवाई कर सकती है।