बदलते मौसम और पटाखों के धुएं ने लोगों की सांसें फुला दीं। दो दिनों में बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल में सांस में दिक्कत वाले 600 से अधिक मरीजों को भर्ती करना पड़ा है। वहीं, 30 से अधिक मरीज पटाखा फोड़ने के दौरान घायल हुए हैं, जिनका इलाज बर्न वार्ड में चल रहा है।
जिला अस्पताल में 24 अक्तूबर को इमरजेंसी वार्ड में 131 मरीज पहुंचे थे। इनमें 57 मरीजों को भर्ती करने की जरूरत पड़ी। 25 से 30 फीसदी मरीज ऐसे थे, जिन्हें पहले से सांस लेने में दिक्कत थी। 20 से 25 फीसदी मरीजों को उल्टी, दस्त की समस्या थी। 25 अक्तूबर को 159 मरीज पहुंचे थे। इनमें से 92 मरीजों को भर्ती करना पड़ा।
इस बीच 10 से 15 मरीज पटाखा जलाने के दौरान घायल हो गए थे, जिन्हें बर्न वार्ड में भर्ती करना पड़ा है। जिला अस्पताल के एमडी फिजिशियन डॉ राजेश कुमार ने बताया कि बदल रहे मौसम और पटाखों के धुएं की वजह से सांस लेने में तकलीफ लेने वाले मरीजों को ज्यादा दिक्कत हुई है।
वहीं, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में 24 अक्तूबर को 315 मरीज पहुंचे थे। इनमें से 278 मरीजों को भर्ती करना पड़ा। इन मरीजों में 53 मरीज हड्डी रोग विभाग में इलाज के लिए आए थे। 70 फीसदी मरीज मेडिसिन विभाग में भर्ती हुए हैं। इसी तरह 25 अक्तूबर को 252 मरीज पहुंचे। इनमें से 191 मरीजों को भर्ती करना पड़ा।
इन मरीजों में 65 मरीज हड्डी रोग विभाग में भर्ती किए गए थे। कॉलेज के प्राचार्य डॉ गणेश कुमार ने बताया कि त्योहार में इमरजेंसी में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। इन मरीजों में ज्यादातर युवा शामिल होते हैं। ज्यादातर केस सड़क दुर्घटना के होते हैं। दिवाली की वजह से सीने में जकड़न वाले मरीज भी पहुंचे थे।