- मस्जिदों में चल रहा है दर्स, लोगों को बता रहे कर्बला की कहानी
गोरखपुर। छठी मुहर्रम को मस्जिदों व घरों में जिक्रे शोहदा-ए-कर्बला महफिलों का दौर जारी रहा। कुरआन ख्वानी हुई। घासीकटरा स्थित कर्बला में अकीदतमंद फातिहा ख्वानी के लिए पहुंचे। नखास, गौसे आजम फाउंडेशन ने कई जगहों पर लंगरे हुसैनी बांटा। लंगर बांटने में समीर अली, मो. फैज, वसीम अहमद, तौसीफ खान आदि शामिल रहे। अल कलम एसोसिएशन की ओर से हाफिज रहमत अली निजामी ने भी लंगरे हुसैनी बांटा।
इस्लाम चक जाफरा बाजार में महफिल जिक्रे शोहदा-ए-कर्बला के तहत हाफिज रहमत अली निजामी ने कहा कि इंसानियत और इस्लाम धर्म को बचाने के लिए पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपने कुनबे और साथियों की कुर्बानी कर्बला के मैदान में दी।
गौसिया मस्जिद छोटे काजीपुर में मौलाना मुहम्मद अहमद ने कहा कि इमाम हुसैन को कर्बला के तपते हुए रेगिस्तान पर इस्लाम धर्म की हिफाजत के लिए तीन दिन व रात भूखा प्यासा रहना पड़ा। फिर भी हजरत इमाम हुसैन ने इस्लाम धर्म को बुलंद करने के लिए सब्र का दामन नहीं छोड़ा।
मदीना मस्जिद रेती चौक में मुफ्ती मेराज अहमद ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का काफिला 61 हिजरी को कर्बला के तपते हुए रेगिस्तान में पहुंचा। रास्ते में पड़ने वाले हर शहर और कूचे में जुल्म और प्यार के फर्क को दुनिया को बताते चल रहा था। अंत में दरूदो सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व शांति की दुआ मांगी गई।
तुर्कमानपुर में लगी पोस्टर प्रदर्शनी ''''''''हमारे हैं हुसैन''''''''
छठी मुहर्रम को रशीद मंजिल तुर्कमानपुर के पास पोस्टर प्रदर्शनी ''''''''हमारे हैं हुसैन'''''''' लगाई गई। इमाम हुसैन की जिंदगी और शिक्षाओं पर आधारित पर्चा बांटा गया। प्रदर्शनी में नायब काजी मुफ्ती मुहम्मद अजहर शम्सी ने कहा कि इमाम हुसैन ने शहादत देकर इस्लाम धर्म व मानवता को बचा लिया। इमाम हुसैन कल भी जिंदा थे, आज भी जिंदा हैं और सुबह कयामत तक जिंदा रहेंगे। कत्ले हुसैन असल में मरगे यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद।