इन बिंदुओं पर हुई जांच
- - लाभार्थी वास्तविक रूप में गांव में रहता है या नहीं। लाभार्थी की पात्रता व अपात्रता की भी जांच हुई
- - लाभार्थी को मानक के अनुसार अनाज वितरण हुआ है या नहीं।
- - लाभार्थियों को प्राप्त राशन में घटतौली तो नहीं की गई है या किसी प्रकार की अनियमितता तो नहीं है।
- - कोटेदार को आवंटित अनाज एवं वितरण के सापेक्ष स्टाक की स्थिति
- - जांच के दौरान अनियमितता एवं घटतौली पाए जाने पर जांच अधिकारी कोटेदार के पिछले तीन महीने के वित्तीय अनियमितता का आकलन कर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।
इन कोटेदारों की हुई जांच
सदर तहसील के ग्राम सालेह, औरंगाबाद के कोटेदार, ग्राम कुशहरा के कोटेदार, सहजनवा तहसील में पाली ब्लॉक के ग्राम पाली के कोटेदार श्रीराम, पिपरौली ब्लॉक के ग्राम कैली के कोटेदार विजय प्रताप सिंह, कैंपियरगंज के ग्राम जंगल बब्बन के कोटेदार, ग्राम बजही के कोटेदार, चौरीचौरा के ग्राम रसूलपुर (बलूघट्टा टोला) के कोटेदार लोरिक प्रसाद, ग्राम बोहाबार के कोटेदार शंभू निषाद, खजनी तहसील के ग्राम महमूदपुर के कोटेदार राहुल सिंह, ग्राम रसूलपुर बाबू की कोटेदार सुनीता, बांसगांव तहसील के ग्राम करवल मझगांवा की कोटेदार प्रेमलता, ग्राम इटकौली के कोटेदार रामानंद, गोला तहसील के ग्राम मदरहा के कोटेदार, ग्राम नेवादा के कोटेदार की जांच का जिम्मा जांच अधिकारियों को दिया गया था।
डीएम विजय किरन आनंद ने कहा कि कोटेदारों द्वारा घटतौली और राशन कार्डधारकों को बेवजह दौड़ाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। टीम बनाकर ऐसे 14 कोटेदारों की जांच कराई गई है। एसडीएम, तहसील को जांच सौंपी गई है। उनकी सहायता के लिए 10-10 राजस्व कर्मचारी भी लगाए गए हैं। छह मई को जांच टीम रिपोर्ट देगी। दोषी पाए जाने वाले कोटेदारों पर एफआईआर होगी। उनका कोटा निरस्त कर स्वयं सहायता समूह को दिया जाएगा। मिलीभगत पाए जाने पर पूर्ति निरीक्षकों पर भी कार्रवाई होगी।