प्रौढ़ावस्था आने से पहले ही कोरोना संक्रमण के साइड इफेक्ट ने कई लोगों के दाढ़ी और सिर के बाल सफेद कर दिए। बीआरडी मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ओपीडी में ऐसे मरीजआ रहे हैं। इससे डॉक्टर चिंतित हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना ने शरीर में कुछ विशिष्ट पौष्टिक तत्वों की कमी ला दी है, इससे बाल सफेद हो रहे हैं। ओपीडी में रोजाना दस में से तीन मरीज ऐसे आ रहे हैं। एक तरह से कोरोना ने कम उम्र में ही बुढ़ापा ला दिया है। युवाओं तक के दाढ़ी-बाल सफेद हो गए हैं।
कोरोना संक्रमण से निजात के बाद मरीजों की दिक्कतें बढ़ी हैं। जिला अस्पताल के चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. एनके वर्मा के मुताबिक बाल झड़ने की समस्या बढ़ी है। दस में से सात मरीजों के बाल तेजी से झड़ रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या बाल व दाढ़ी का पूरी तरह से सफेद होना है। कम उम्र के युवाओं के बाल-दाढ़ी सफेद हो गए हैं। ऐसे मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
संक्रमण की वजह से शरीर में तमाम पोषक तत्वों की कमी हो गई है। डॉक्टर वर्मा ने ऐसे मरीजों को पौष्टिक आहार लेने की सलाह दी है। साथ ही कहा कि धूल से बालों का बचाव जरूरी है। अगर समय से इलाज हो जाए तो समस्या ठीक हो जाती है।
केस-1
रेलवे के ऑपरेटिंग विभाग में कार्यरत चीफ कंट्रोलर एके मिश्रा (53) कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमित हो गए थे। इलाज हुआ और ठीक हो गए। संक्रमण से निजात के तीन महीने बाद ही सिर व दाढ़ी के बाल सफेद हो गए। एके मिश्रा कहते हैं कि सारे बाल सफेद हो गए। यह दुखदायी है। कोरोना ऐसा दर्द देगा, सोचा भी नहीं था।
केस-2
दक्षिणी बेतियाहाता के सुशील पांडेय (40) एक निजी कंपनी में काम करते हैं। कोरोना की पहली लहर में कोरोना वायरस की चपेट में आ गए। एक महीने तक संघर्ष किया, फिर ठीक हो सके। सुशील कहते हैं कि कोरोना के साइड इफेक्ट अब देखने को मिले हैं। पूरी दाढ़ी सफेद हो गई है। दाढ़ी सफेद होने से बुढ़ापा महसूस होने लगा है। लिहाजा, क्लीन शेव ही रहते हैं।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चर्मरोग विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष सिंह ने बताया कि समय से पहले बाल सफेद होने की समस्या बढ़ी है। इसे प्री मेच्योर केनाइटिस कहते हैं। पोस्ट कोविड मरीजों में बाल झड़ने की भी समस्या है। इसे टैलोजेन एफ्लूवियम कहते हैं। यह दिक्कत शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी से आती है। अगर समय से इलाज करा लिया जाए तो गंभीर समस्या से निजात मिल सकती है।