देश-विदेश में सिद्धार्थनगर की पहचान बन चुके ‘काला नमक चावल की उपयोगिता’ विषय पर सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग की ओर से शुक्रवार को ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया गया।
विशिष्ट अतिथि संयुक्त राष्ट्रसंघ के खाद्य एवं कृषि संगठन के पूर्व मुख्य तकनीकी सलाहकार प्रो. रामचेत चौधरी ने कहा कि काला नमक चावल में व्यापक औषधीय गुण हैं। ऋषि प्रसाद कहा जाने वाला यह चावल प्राचीनतम प्रजाति का है। चीनी यात्री ह्वेनसांग के लेखों में काला नमक चावल का उल्लेख भगवान बुद्ध द्वारा दिए जाने वाले प्रसाद के रूप में किया गया है।
काला नमक चावल शुगर फ्री होने के कारण मधुमेह रोगियों के लिए भी सुपाच्य है। इसमें अन्य चावल की अपेक्षा प्रोटीन, जिंक, आयरन आदि तत्वों की मात्रा लगभग दोगुनी है। यद्यपि कि इसकी पैदावार थोड़ी कम है फिर भी बाजार मूल्य सर्वाधिक है। ऐसे में उत्पादन तकनीक का विकास, शोधन के जरिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज बनाकर किसानों को अधिक उत्पादन के लिए प्रेरित किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने सिद्धार्थनगर सहित नेपाल से लेकर घाघरा नदी के बीच स्थित 11 जिलों को काला नमक की खेती के लिए चिह्नित किया है। जिले के अलीगढ़वा क्षेत्र को काला नमक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना चल रही है। काला नमक चावल की ब्रांडिंग के लिए महत्वाकांक्षी योजना बनाई गई है। बीते वर्षों में इस चावल की कई प्रजातियां विकसित की गई हैं।
लक्ष्य है कि से एक लाख हेक्टेयर में इसकी खेती हो। कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि काला नमक चावल की एतिहासिक विरासत को पुनर्जीवित करने में विश्वविद्यालय भी सहभागी बनेगा। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु आसपास के किसानों की उन्नति का बड़ा केंद्र बनने जा रहा है।
ऑनलाइन विशिष्ट व्याख्यान में कार्यक्रम संयोजक डॉ. दीपक बाबू ने आभार ज्ञापित किया और डॉ. सत्यम त्रिपाठी ने संचालन किया। इस दौरान विवि एवं विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक, विद्यार्थी और किसानों ने सहभागिता किया।