अब उन्होंने पर्यावरण को बढ़ते खतरे को देखते हुए अपना नया शोध किया है। शिवम बताते हैं-पूरे देश में पर्यावरण प्रदूषण खतरनाक स्तर पार कर गया है। विशेषज्ञों ने तमाम अध्ययन के बाद यह पाया है गया कि इसकी बड़ी वजह गाड़ियाें और जेनरेटर के धुंए से निकलने वाले खतरनाक रासायनिक तत्व हैं।
इसके बाद से ही उन्हें इस विषय पर शोध शुरू करने का विचार मन में आया। अब दो साल की कड़ी मेहनत के बाद कामयाबी हासिल कर ली। शिवम ने बताया कि दुबई की ट्रांसपोर्ट कंपनी ने ट्रायल के तौर पर 10 डिवाइस लिए थे, करीब छह से सात महीने हो गए हैं डिवाइस के इस्तेमाल से कंपनी संतुष्ट है। अब वे भारत सरकार के पास अपना प्रोजेक्ट भेजेंगे।
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शिवम बताते हैं, दोपहिया वाहनों में सामान्य फिल्टर करीब 500 रुपये का आता है, जबकि उनके डिवाइस युक्त फिल्टर की तागत 900 रुपये आएगी। लेकिन, उनके डिवाइस की उम्र दो गुना से ज्यादा है। इसलिए लोगाें को अतिरिक्त खर्च का भार सहन नहीं करना पड़ेगा।
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ऐसे काम करेगा डिवाइस
गाड़ियों में फिल्टर की जगह इस डिवाइस को लगाया जाएगा, इसमें भी एक केमिकल युक्त फिल्टर है। जो जहरीले पदार्थ कार्बन डाई आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड, सल्फर डाई आक्साइड को ब्रेक कर देता है। धुएं के साथ ऑक्सीजन और नाइट्रोजन बाहर आ जाता है। जबकि, कार्बन, सल्फर आदि तत्व को रोक लेता है।